lafz ae aaKHir ko main izhaar bataa kar rakhta | लफ्ज़ ए आख़िर को मैं इज़हार बता कर रखता

  - Shahzan Khan Shahzan'
लफ्ज़आख़िरकोमैंइज़हारबताकररखता
औरदुनियाकोमुहब्बतसेबचाकररखता
तेरीजानिबसेअगरआतामुझेएकभीख़त
अपनेसरकामैंउसेताजबनाकररखता
गरख़बरहोतीकेतूमुझसेबिछड़जाएगा
तुझकोसीनेसेमेरीजानलगाकररखता
पहलेरखतामैंकोईख़ुशबूलगाकरदिलमें
औरफिरघरतिराफूलोंसेसजाकररखता
इकइकदिनतोयेसचसबकोपताचलनाथा
तुझकोकबतकमैंजहाँभरसेछुपाकररखता?
इकबुरीशयकीतरहछोड़दियाहैजिसको
येभीमुमकिनथाकेपलकोंपेबिठाकररखता
  - Shahzan Khan Shahzan'
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