kya kahooñ kaise iztiraar men hooñ | क्या कहूँ कैसे इज़्तिरार में हूँ

  - Shahid Zaki
क्याकहूँकैसेइज़्तिरारमेंहूँ
मैंधुआँहोकेभीहिसारमेंहूँ
अबमुझेबोलनानहींपड़ता
अबमैंहरशख़्सकीपुकारमेंहूँ
जिसकेआगेहैआईनादीवार
मैंभीकिरनोंकीउसक़तारमेंहूँ
आहटोंकाअसरनहींमुझपर
जानेमैंकिसकेइंतिज़ारमेंहूँ
पर्दा-पोशीतिरीमुझीसेहै
तेरेआँचलकेतारतारमेंहूँ
तंगलगतीहैअबवोआँखमुझे
दफ़्नजैसेकिसीमज़ारमेंहूँ
मुझेमेंइकज़लज़लासाहै'शाहिद'
मैंकईदिनसेइंतिशारमेंहूँ
  - Shahid Zaki
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy