ye kaun hai jo KHvaab men mujhe sikha rahi ghazal | ये कौन है जो ख़्वाब में मुझे सिखा रही ग़ज़ल

  - Adnan Ali SHAGAF
येकौनहैजोख़्वाबमेंमुझेसिखारहीग़ज़ल
मुझेनहींपताकहाँकहाँसेरहीग़ज़ल
जफ़ासमेटतेहुएमैंजबकभीबिखरगया
तोहर्फ़हर्फ़जोड़करमुझेबनारहीग़ज़ल
सुनोतुम्हारीबातोंमेंनशानशासालगरहा
तुम्हारेइनलबोंपेजैसेमुस्कुरारहीग़ज़ल
कहाँचलीमता-ए-जाँकिरुकज़रासासब्रकर
येतेरीख़ूबियाँहीतोतुझेबतारहीग़ज़ल
येपहलेहमहीशायरोंकेरास्तोंपेचलपड़ी
परअबयेअपनीराहख़ुदहमेंचलारहीग़ज़ल
ज़बानकीजहानमेंयेरेख़्तासितारेहैं
फिरइनसितारोंकेजहाँमेंजगमगारहीग़ज़ल
बड़ीहीपुरकशिशसदारवाँहैउससेेजा-बजा
कि"लहजा-ए-शगफ़"मेंजबवोगुनगुनारहीग़ज़ल
  - Adnan Ali SHAGAF
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