har ik din vo taaza ghazal de raha hai | हर इक दिन वो ताज़ा ग़ज़ल दे रहा है

  - Adnan Ali SHAGAF
हरइकदिनवोताज़ाग़ज़लदेरहाहै
दरख़्त-ए-शकेबाईफलदेरहाहै
ख़ुदातुझसख़ीकोसदाख़ुशरखेजो
फ़क़ीरोंकोअपनामहलदेरहाहै
कभीहीररांझा,कभीलैलामजनू
कभीइश्क़क़ैस-ओ-पुनलदेरहाहै
दिखाकरहमेशाहक़ीक़तकापहलू
मेरीख़्वाहिशोंकोकुचलदेरहाहै
वोगिरगिटहैयाफिरबड़ाकोईसर्जन
किपलभरमेंचेहराबदलदेरहाहै
हैयेकौनआख़िर,'अ़लीज़र्क़अदनान'
'शगफ़'कोजोशेर-ओ-ग़ज़लदेरहाहै
  - Adnan Ali SHAGAF
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