kisi ke ashk pe zinda-dili ka qabza hai | किसी के अश्क पे ज़िंदा-दिली का क़ब्ज़ा है

  - Shadab Javed
किसीकेअश्कपेज़िंदा-दिलीकाक़ब्ज़ाहै
किसीकेहँसनेपेअफ़सुर्दगीकाक़ब्ज़ाहै
येकहकेतेरेमुसव्विरनेरंगफेंकदिए
हरएकरंगपेतस्वीरहीकाक़ब्ज़ाहै
किसीकोज़िन्दगीकहकरबचेहुएहैंहम
हमारीमौतपेअबज़िन्दगीकाक़ब्ज़ाहै
कुछऔरबढ़गईदर्शनकीप्यासआँखोंमें
तेरेसबीलपेतिश्ना-लबीकाक़ब्ज़ाहै
येकिसकेशहरकीगलियाँहैंदिल-ए-सूफ़ी
हरएकअक़्लपेदीवानगीकाक़ब्ज़ाहै
तेरेख़यालकीचौखटसेउठनहींसकता
मेरेशऊरपेअबआगहीकाक़ब्ज़ाहै
तुम्हारीछाँवमेंकरउसीपेक़ाबिज़हूँ
तमामशहरमेंजिसरौशनीकाक़ब्ज़ाहै
  - Shadab Javed
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