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Shaad Imran
tujhe ham KHush rakhenge zindagi bhar
tujhe ham KHush rakhenge zindagi bhar | तुझे हम ख़ुश रखेंगे ज़िंदगी भर
- Shaad Imran
तुझे
हम
ख़ुश
रखेंगे
ज़िंदगी
भर
ये
वा'दा
है,
मगर
दावा
नहीं
है
ग़ज़ल
में
बस
उदासी
भर
रखी
है
ज़रा
भी
हुस्न
का
चर्चा
नहीं
है
- Shaad Imran
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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जितने
अपने
हैं
सब
पराए
हैं
बात
जानी
जब
ज़ख़्म
खाए
हैं
ये
सब
शराबी
कोई
और
नहीं
जाँ
तेरे
ठुकराए,
तेरे
सताए
हैं
ख़ून
थूका
तेरे
जाने
के
ग़म
मैं
हमनें
सिर्फ़
आँसू
नहीं
बहाए
हैं
मस्जिद
एक
रोज़
बुलाया
वाईज
ने
हमने
कह
दिया
नहीं
नहाए
हैं
मौत
पढ़ती
है
काम
करने
में
'शाद'
सिर्फ़
बातें
ही
बनाए
हैं
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Shaad Imran
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हम
जो
दीवानगी
में
मारे
गए
जान
तेरी
ख़ुशी
में
मारे
गए
लोग
पत्थर
को
भी
ख़ुदा
समझे
और
इस
गड़बड़ी
में
मारे
गए
हैं
कई
हाज़िरा
मेरे
अंदर
जिन
के
बेटे
बली
में
मारे
गए
पहले
हम,
मार्क्स
के
मुख़ालिफ़
थे
बाद
में,
मुफ़्लिसी
में
मारे
गए
वो
ही
तो
लोग
जन्नती
होंगे
जो
भी
तेरी
गली
में
मारे
गए
'शाद'
साहब
पे
लानते
भेजो
हिज्र
की
बात
ही
में
मारे
गए
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Shaad Imran
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बात
उसकी
कोई
न
टाली
जाए
सोचता
हूँ
नई
पटा
ली
जाए
देख
कर
उसको
ये
आया
ख़याल
अपने
सर
पर
ये
बला
ली
जाए
अकेलेपन
में
और
क्या
कीजे
वैसी
पिक्चर
ही
चला
ली
जाए
अब
उसकी
याद
आने
वाली
है
अब
इक
सिगरेट
जला
ली
जाए
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Shaad Imran
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अपना
मिलना
है,
ख़ास
लोगों
से
यानी
की
बस
उदास
लोगों
से
Shaad Imran
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पूछते
हो
हिज्र
में
क्या
कर
लिया
?
देख
लो,
रो
रो
के
आधा
कर
लिया
एक
पल
पंखे
को
देखा
घूमते
दूसरे
पल
में
इरादा
कर
लिया
आज
क्यूँँ
काजल
लगाया
आपने
?
किस
लिए
ख़ंजर
नुकीला
कर
लिया
?
हँस
रहे,
वो
क़ब्र
पर
आ
कर
मेरी
कह
रहे,
मुझ
पर
भरोसा
कर
लिया
शा'इरी
में
दर्द
लाने
के
लिए
जान
कर
के
ज़ख़्म
गहरा
कर
लिया
रोक
तो
पाया
नहीं
उस
शख़्स
को
हाँ,
मगर
अच्छा
तमाशा
कर
लिया
'शाद'
अपना
नाम
मैंने
क्या
रखा
हर
ख़ुशी
ने
मुझ
से
झगड़ा
कर
लिया
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Shaad Imran
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