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Sahil Verma
apnon se mujhe hargiz hi door nahin hona
apnon se mujhe hargiz hi door nahin hona | अपनों से मुझे हरगिज़ ही दूर नहीं होना
- Sahil Verma
अपनों
से
मुझे
हरगिज़
ही
दूर
नहीं
होना
दौलत
के
नशे
में
मुझ
को
चूर
नहीं
होना
मर
जाए
जो
कोई
मुझ
सेे
मिलने
को,
जीवन
में
मुझको
कभी
भी
इतना
मशहूर
नहीं
होना
तुम
काम
करो
उतना
पर्याप्त
हो
वो
जितना
तुम
व्यस्त
किसी
में
भी
भरपूर
नहीं
होना
ये
जान
ले,
लोगों
से
ज़िंदा
है
तेरी
हस्ती
सर
चढ़
के
कभी
उनके
मग़रूर
नहीं
होना
- Sahil Verma
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कभी
तो
मुझे
छोड़
जाओगे
तुम
भी
कहोगे
मुझे
अब
कि
फुर्सत
नहीं
है
भला
इस
तरह
क्यूँ
सताने
लगे
हो
कहीं
छोड़
जाने
की
हसरत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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ख़ंजर
चले
किसी
पे
तड़पते
हैं
हम
'अमीर'
सारे
जहाँ
का
दर्द
हमारे
जिगर
में
है
Ameer Minai
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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अमीर
इमाम
के
अश'आर
अपनी
पलकों
पर
तमाम
हिज्र
के
मारे
उठाए
फिरते
हैं
Ameer Imam
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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अब
मैं
समझा
तिरे
रुख़्सार
पे
तिल
का
मतलब
दौलत-ए-हुस्न
पे
दरबान
बिठा
रक्खा
है
Qamar Moradabadi
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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'हसरत'
की
भी
क़ुबूल
हो
मथुरा
में
हाज़िरी
सुनते
हैं
आशिक़ों
पे
तुम्हारा
करम
है
आज
Hasrat Mohani
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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मैं
तुम
सेे
बहुत
सुन्दर
दिखता
तो
नहीं
लेकिन
तुम
मेरी
तरह
इतने
अय्यार
नहीं
दिखते
Sahil Verma
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यूँँ
ही
नहीं
वो
चाँद
तकती
रहती
है
लगता
है
बातें
दिल
की
उस
सेे
कहती
है
Sahil Verma
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ये
ग़ज़ल
ग़ैर
मुसलसल
है
पर
इस
में
मतला
है
न
ही
मक़्ता
है
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Sahil Verma
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सतयुग
में
तुझे
देखा
द्वापर
में
तुझे
देखा
कलयुग
में
मगर
तेरे
अवतार
नहीं
दिखते
Sahil Verma
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दिखती
है
सखी
तुमको
नाराज़गी
उसकी
पर
चुप
चुप
के
किए
उसके
उपकार
नहीं
दिखते
Sahil Verma
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