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Sarvjeet Singh
dhoondhta hai tu KHuda ko
dhoondhta hai tu KHuda ko | ढूँढता है तू ख़ुदा को?
- Sarvjeet Singh
ढूँढता
है
तू
ख़ुदा
को?
देख
बच्चा
खेलता
जो
- Sarvjeet Singh
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तेरी
ख़ातिर
ख़ुदास
हम
दु'आ
करते
नहीं
करते
भला
हम
और
क्या
करते
Arohi Tripathi
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कश्तियाँ
सब
की
किनारे
पे
पहुँच
जाती
हैं
नाख़ुदा
जिन
का
नहीं
उन
का
ख़ुदा
होता
है
Ameer Minai
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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थे
ख़ुदा
को
मानने
वाले
बड़ी
तादाद
में
है
तअज्जुब
पर
ख़ुदा
की
मानता
कोई
न
था
Rao Nasir
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वक़्त
ए
इफ़्तार
ख़ुद
रब
था
मेरे
क़रीब
तुझ
से
बढ़
कर
मगर
कुछ
न
माँगा
गया
Afzal Ali Afzal
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कहा
था
क्या
और
क्या
बने
हो
अजब
सा
इक
मसअला
बने
हो
हमारी
मर्ज़ी
कहाँ
थी
शामिल
तुम
अपने
मन
से
ख़ुदा
बने
हो
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Ritesh Rajwada
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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क्या
ग़लत
और
क्या
सही
बात
तो
बस
है
वही
जो
न
तुमने
थी
सुनी
जो
न
हमने
थी
कही
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Sarvjeet Singh
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मैं
अच्छा
इंसान
नहीं
हूँ
हाँ
लेकिन
हैवान
नहीं
हूँ
बस
मतले
से
बूझ
सको
तुम
इतना
भी
आसान
नहीं
हूँ
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Sarvjeet Singh
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कि
तुझको
ढूँढ़
के
देखा
सभी
में
मगर
तू
मिल
नहीं
पाया
किसी
में
गुज़रती
उम्र
गर
ये
साथ
तेरे
मज़ा
कुछ
और
आता
ज़िन्दगी
में
तुझे
भूलूँ
भी
तो
फिर
किस
तरह
से
मकाँ
तेरा
है
मेरी
ही
गली
में
मुसलसल
बढ़
रहा
है
फ़ासला
अब
कि
मुझ
में
और
अच्छे
आदमी
में
वो
जिसको
सेव
करना
था
ना
मुझको
वो
मुझ
सेे
कट
गया
है
हड़बड़ी
में
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Sarvjeet Singh
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दु'आ
है
ये
मिरी
अब
के
नए
इस
साल
में
यारा
तिरी
मंज़िल
मिले
तुझको
तिरा
साहिल
मिले
तुझको
Sarvjeet Singh
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क्या
डरें
हम
भूत-डायन-सी
किसी
भी
बद-बला
से
आदमी
से
ही
नहीं
महफ़ूज़
है
जब
आदमी
अब
Sarvjeet Singh
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