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Sarvjeet Singh
zindagi khushiyaan paraai dhoondhti hai
zindagi khushiyaan paraai dhoondhti hai | ज़िन्दगी ख़ुशियाँ पराई ढूँढती है
- Sarvjeet Singh
ज़िन्दगी
ख़ुशियाँ
पराई
ढूँढती
है
सब
दुखों
से
ही
रिहाई
ढूँढती
है
इस
दफ़ा
भी
हाथ
आई
बदनसीबी
एक
राखी
को
कलाई
ढूँढती
है
ढूँढता
है
एक
भाई
एक
बहना
एक
बहना
एक
भाई
ढूँढती
है
- Sarvjeet Singh
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लहू
वतन
के
शहीदों
का
रंग
लाया
है
उछल
रहा
है
ज़माने
में
नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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न
जाने
ख़त्म
हुई
कब
हमारी
आज़ादी
तअल्लुक़ात
की
पाबंदियाँ
निभाते
हुए
Azhar Iqbal
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दिल
से
जो
बात
निकलती
है
असर
रखती
है
पर
नहीं
ताक़त-ए-परवाज़
मगर
रखती
है
Allama Iqbal
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अश्कों
को
आरज़ू-ए-रिहाई
है
रोइए
आँखों
की
अब
इसी
में
भलाई
है
रोइए
Abbas Qamar
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उस
ने
अपना
बना
के
छोड़
दिया
क्या
असीरी
है
क्या
रिहाई
है
Jigar Moradabadi
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मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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जाने
क्या
सोच
के
फिर
इन
को
रिहाई
दे
दी
हम
ने
अब
के
भी
परिंदों
को
तह-ए-दाम
किया
Ambar Bahraichi
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वैसे
मुझको
विश्वास
नहीं
फिर
भी
इक
झूटी
आस
समझ
लो
अब
हम
दोनों
को
मिलवा
सकता
है
तो
जादू-टोना
ख़ाली
Sarvjeet Singh
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उन
लम्हों
को
भूल
गए
तुम
उन
वादों
को
भूल
गए
तुम
उन
अपनों
के
आने
पर
फिर
इन
अपनों
को
भूल
गए
तुम
अपना
काम
निकल
जाने
पर
फिर
रिश्तों
को
भूल
गए
तुम
सारी
दुनिया
याद
रही
पर
कुछ
लोगों
को
भूल
गए
तुम
ऐसी
भी
क्या
मजबूरी
थी
जो
सपनों
को
भूल
गए
तुम
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Sarvjeet Singh
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इक
दिन
फिर
से
फ़ोन
तुम्हारा
आएगा
उस
इक
दिन
की
ख़ातिर
कितने
दिन
बीते
Sarvjeet Singh
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ऐसा
लगता
है
ये
धड़कन
जारी
है
जब
तक
मेरी
तुम
सेे
अनबन
जारी
है
छोटी
छोटी
बातों
पर
लड़
लेते
हैं
अब
तक
हम
दोनों
का
बचपन
जारी
है
मजबूरी
है
उसको
छोड़
नहीं
सकते
बस
इक
रिश्ता
है
जो
बेमन
जारी
है
तेरे
आने
की
आशा
में
दिन
गिनना
बावन
तिरपन
चौवन
पचपन
जारी
है
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Sarvjeet Singh
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मरते
दम
तक
उनको
मुझ
सेे
तकलीफ़
रहेगी
जब
मर
जाऊँगा
बोलेंगे
कितना
अच्छा
था
Sarvjeet Singh
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