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Sarvjeet Singh
vaise mujhko vishwas nahin phir bhi ik jhooti aas samajh lo
vaise mujhko vishwas nahin phir bhi ik jhooti aas samajh lo | वैसे मुझको विश्वास नहीं फिर भी इक झूटी आस समझ लो
- Sarvjeet Singh
वैसे
मुझको
विश्वास
नहीं
फिर
भी
इक
झूटी
आस
समझ
लो
अब
हम
दोनों
को
मिलवा
सकता
है
तो
जादू-टोना
ख़ाली
- Sarvjeet Singh
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मैं
तुझे
खो
के
भी
ज़िंदा
हूँ
ये
देखा
तूने
किस
क़दर
हौसला
हारे
हुए
इंसान
में
है
Abbas Tabish
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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भँवर
से
कैसे
बच
पाया
किसी
पतवार
से
पूछो
हमारा
हौसला
पूछो,
तो
फिर
मझधार
से
पूछो
Priyanshu Tiwari
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जिसे
बस
देखने
की
आस
में
जीते
थे
कल
तक
हम
दिया
पैग़ाम
कल
उसने
कि
मैं
तो
अब
पराया
हूँ
Amaan Pathan
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हमने
ही
लौटने
का
इरादा
नहीं
किया
उसने
भी
भूल
जाने
का
वा'दा
नहीं
किया
Parveen Shakir
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मुझे
यक़ीं
है
ये
ज़हमत
नहीं
करेगा
कोई
बिना
गरज़
के
मोहब्बत
नहीं
करेगा
कोई
न
ख़ानदान
में
पहले
किसी
ने
इश्क़
किया
हमारे
बाद
भी
हिम्मत
नहीं
करेगा
कोई
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Asad Taskeen
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हम
घूम
चुके
बस्ती
बन
में
इक
आस
की
फाँस
लिए
मन
में
Ibn E Insha
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
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Kumar Vishwas
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उस
सेे
पहले
भी
क्या
मुझको
ज़्यादा
हासिल
था
वो
आँखों
का
धोखा
था
जो
समझा
साहिल
था
वैसे
उसकी
सूरत
अब
कुछ
ज़्यादा
याद
नहीं
पर
इतना
मालूम
कि
ठोड़ी
पर
उसकी
तिल
था
ना
जाने
कैसे
ये
मेरी
धड़कन
चलती
है
उसने
मुझको
लौटाया
ही
ना
मेरा
दिल
था
मेरी
नज़रों
में
बाकी
सारा
जग
दोषी
है
बस
उस
पर
इल्ज़ाम
नहीं
जो
सच
में
क़ातिल
था
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Sarvjeet Singh
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सुंदरता
अब
इस
पर
निर्भर
करती
है
क्या
कौन
यहाँ
पर
कपड़े
कितने
कम
पहनेगा
Sarvjeet Singh
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जिसे
कभी
पढ़ा
नहीं
उसे
लिखा
है
हर
दफ़ा
Sarvjeet Singh
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ये
शे'र
जो
मैं
लिख
रहा
हूँ
कौन
पूछेगा
इसे
ये
शे'र
जो
तुम
पढ़
रही
हो
हर
ज़बाँ
पर
होगा
अब
Sarvjeet Singh
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अब
इस
दुनिया
से
क्या
लेना,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
कौन
कहाँ
किसका
कैसा
क्या,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
बाहर
इतना
शोर
मचा
है
आज
बड़ी
सर्दी
है,तो
फिर
मुझको
क्यूँ
नईं
लगती
अच्छा,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
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Sarvjeet Singh
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