kabhi iski qasam khao kabhi uski qasam khao | कभी इसकी क़सम खाओ कभी उसकी क़सम खाओ

  - Sarvjeet Singh
कभीइसकीक़समखाओकभीउसकीक़समखाओ
नहींतुमझूठकहतेहोचलोमेरीक़समखाओ
वफ़ाकोमापनेकाइकअलगउसकाहैपैमाना
तुम्हेंमुझसेेमुहब्बतहैअगरसच्ची,क़समखाओ
उसेविश्वासहीहोतानहींचाहेमैंजोकहलूँ
क़समखाओअगरबोलाहैतोजल्दीक़समखाओ
मुझेमालूमहैतुमकलकिसीकेसाथथेफिरसे
अगरऐसानहींहैतोमिरेसरकीक़समखाओ
किसीभीझूठकोतुमसचबनासकतेनहीं,चाहे
किसीपोथीपेरखकेहाथजोमर्ज़ीक़समखाओ
येकलयुगहैमिरेप्यारेयहाँसबकुछहीचलताहै
यहाँकोईनहींमरताकितुमझूटीक़समखाओ
  - Sarvjeet Singh
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