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Sarul
milnaa julnaa to likha hai nahin taqdeeron men
milnaa julnaa to likha hai nahin taqdeeron men | मिलना जुलना तो लिखा है नहीं तक़दीरों में
- Sarul
मिलना
जुलना
तो
लिखा
है
नहीं
तक़दीरों
में
कम
से
कम
ख़ुश
तो
दिखाई
पड़ो
तस्वीरों
में
- Sarul
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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वो
रस्मन
पूछ
लेती
है
कि
मिलना
या
नहीं
मिलना
फिर
इसके
बाद
तो
मिलना
किसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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मुझ
से
मिलना
तो
ऐसे
मिलना
तू
मिले
है
गुल
को
जैसे
रंग-ओ-बू
Chandan Sharma
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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उस
से
मिलना
तो
उसे
ईद-मुबारक
कहना
ये
भी
कहना
कि
मिरी
ईद
मुबारक
कर
दे
Dilawar Ali Aazar
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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ये
भी
मुमकिन
है
मियाँ
आँख
भिगोने
लग
जाऊँ
वो
कहे
कैसे
हो
तुम
और
मैं
रोने
लग
जाऊँ
ऐ
मेरी
आँख
में
ठहराए
हुए
वस्ल
के
ख़्वाब
मैं
तवातुर
से
तेरे
साथ
न
सोने
लग
जाऊँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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बदलता
जा
रहा
है
रस्ता
दरिया
मैं
अंदर
रेत
होता
जा
रहा
हूँ
Sarul
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बोलते
कुछ
तो
ख़ामुशी
के
बाद
कैसा
लगता
है
दिल-लगी
के
बाद
यूँँ
है
लगता
किसी
किसी
के
बाद
घर
नहीं
घर
है
रुख़सती
के
बाद
यूँँ
ही
रहते
हैं
सब
उमीद
में
या
ज़िंदगी
है
भी
ज़िंदगी
के
बाद
उस
सेे
मिलकर
के
हो
गईं
सदियाँ
वो
जो
रहता
है
दो
गली
के
बाद
एक
भूले
हुए
की
याद
में
फिर
दिल
दुखाता
हूँ
मैं
ख़ुशी
के
बाद
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Sarul
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पगली
अब
मुझ
सेे
जाने
कितने
दिन
तक
नाराज
रहे
कल
की
शब
उसके
सपने
में
थोड़ी
देर
से
पहुँचा
मैं
Sarul
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दूसरा
हम
सेफ़र
मुबारक
हो
यूँँ
मेरा
साथ
कुछ
बुरा
तो
न
था
Sarul
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जहान
भर
में
अजब
मुहाली
पड़ी
हुई
है
किसान
तेरी
ज़मीन
ख़ाली
पड़ी
हुई
है
Sarul
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