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Lokesh Vashishtha
pahle saani misra likhkhon phir oolaa baandha jaayega
pahle saani misra likhkhon phir oolaa baandha jaayega | पहले सानी मिसरा लिख्खो फिर ऊला बाँधा जाएगा
- Lokesh Vashishtha
पहले
सानी
मिसरा
लिख्खो
फिर
ऊला
बाँधा
जाएगा
ग़म
हँसते-हँसते
सहलो
तो
ग़म
रोता-रोता
जाएगा
- Lokesh Vashishtha
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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जीना
मुश्किल
है
के
आसान,
ज़रा
देख
तो
लो
लोग
लगते
हैं
परेशान,
ज़रा
देख
तो
लो
इन
चराग़ों
के
तले
ऐसे
अँधेरे
क्यूँँ
हैं?
तुम
भी
रह
जाओगे
हैरान,
ज़रा
देख
तो
लो
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Javed Akhtar
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जब-जब
तेरी
आँखें
बोली
मैंने
दिल
की
खिड़की
खोली
रात
दिवाली
होगी
सारी
रोज़
मनाई
मैंने
होली
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Lokesh Vashishtha
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इश्क़
करके
थक
गया
था
झूठ
है
दिल
निठल्ला
हो
चुका
था
झूठ
है
वक़्त
तन्हा
हो
रहा
चलते
हुए
वो
अकेला
ही
चला
था
झूठ
है
चाँद
तारे
या
गुलाबी
फूल
हों
वो
इनामों
से
रुका
था
झूठ
है
राम
सीता
कृष्ण
राधा
सच
यही
प्रेम
बाक़ी
जो
सुना
था
झूठ
है
तुम
गई
सरगोश
पागल
हो
गया
प्यार
उसका
बेतुका
था
झूठ
है
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Lokesh Vashishtha
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ज़माने
की
हक़ीक़त
से
न
कोई
वास्ता
गर
हो
मरीज़े-दिल
मुहब्बत
को
दु'आ
मानें
दवा
समझें
Lokesh Vashishtha
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मयकश
तुझको
देखे
भर
से
पीना
छोड़े
बैठे
होंगे
भूले
से
तुम
छू
दो
तो
फिर
सालों
तक
भी
नशा
न
उतरे
Lokesh Vashishtha
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राम
सीता
कृष्ण
राधा
सच
यही
प्रेम
बाक़ी
जो
सुना
था
झूठ
है
Lokesh Vashishtha
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