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Sanskar 'Sanam'
un aawaazon se mujhko dar lagta hai
un aawaazon se mujhko dar lagta hai | उन आवाज़ों से मुझको डर लगता है
- Sanskar 'Sanam'
उन
आवाज़ों
से
मुझको
डर
लगता
है
जिन
में
लोगों
का
चिल्लाना
शामिल
है
वो
सच्चाई
सच
कैसे
होगी
आख़िर
जिस
में
थोड़ा
सा
अफ़साना
शामिल
है
- Sanskar 'Sanam'
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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कोहरा
तो
इस
उदासी
का
घना
है
और
सबका
दिल
भी
पत्थर
का
बना
है
रोने
से
मन
हल्का
होता
होगा
लेकिन
मैं
तो
लड़का
हूँ,
मुझे
रोना
मना
है
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Daqiiq Jabaali
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कि
प्यासे
को
समुंदर
दिख
रहा
है
ये
क्यूँ
शहरों
में
लश्कर
दिख
रहा
है
मैं
उसको
जान
अपनी
मानता
था
पर
अब
उसका
भी
तेवर
दिख
रहा
है
ये
सब
नेता
जो
जनता
से
बने
हैं
उन्हें
जनता
में
नौकर
दिख
रहा
है
है
वो
अपने
अहम
में
चूर
ऐसा
उसे
हर
शख़्स
कमतर
दिख
रहा
है
थका
हारा
वो
दफ़्तर
से
है
आया
उसे
तो
बस
वो
बिस्तर
दिख
रहा
है
कि
गौरी
ने
जो
दर्पन
में
है
देखा
उसे
तो
ख़ुद
में
शंकर
दिख
रहा
है
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Sanskar 'Sanam'
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इक
कच्चे
धागे
में
सिमटा
होता
है
दुनिया
भर
में
सब
सेे
पक्का
वो
रिश्ता
Sanskar 'Sanam'
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कि
मुझ
सेे
रोज़
ही
जगती
ये
रातें
बात
करती
हैं
मेरी
बातों
से
अक्सर
तेरी
बातें
बात
करती
हैं
अगर
बातों
से
भूतों
को
समझ
आए
तो
अच्छा
है
वगरना
बाद
उसके
मेरी
लातें
बात
करती
हैं
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Sanskar 'Sanam'
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घर
की
चीज़ें
फैला
करके
बैठी
है
अपना
चेहरा
कैसा
करके
बैठी
है
इक
मैं
हूँ
जो
तेरी
बातें
करता
हूँ
इक
तू
है
जो
ग़ुस्सा
करके
बैठी
है
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Sanskar 'Sanam'
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कि
इस
आँगन
में
तारे
गिर
रहे
हैं
ज़रा
दामन
बिछाकर
देखिए
ना
बड़ी
दिलकश
है
कॉलर
ट्यून
मेरी
कभी
नंबर
लगाकर
देखिए
ना
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Sanskar 'Sanam'
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