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Sanskar 'Sanam'
maa par chillate hain to dukh hota hai
maa par chillate hain to dukh hota hai | माँ पर चिल्लाते हैं तो दुख होता है
- Sanskar 'Sanam'
माँ
पर
चिल्लाते
हैं
तो
दुख
होता
है
माँ
लड़कों
की
इकलौती
कमज़ोरी
है
- Sanskar 'Sanam'
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एक
दिन
की
ख़ुराक
है
मेरी
आप
के
हैं
जो
पूरे
साल
के
दुख
Varun Anand
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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अब
लगता
है
ठीक
कहा
था
'ग़ालिब'
ने
बढ़ते
बढ़ते
दर्द
दवा
हो
जाता
है
Madan Mohan Danish
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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अब
जो
कोई
पूछे
भी
तो
उस
से
क्या
शरह-ए-हालात
करें
दिल
ठहरे
तो
दर्द
सुनाएँ
दर्द
थमें
तो
बात
करें
Faiz Ahmad Faiz
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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इस
दुनिया
में
घटिया
लोगों
की
ख़ातिर
फूलों
को
भी
पत्थर
होना
पड़ता
है
गौरी
सा
जीवन
साथी
पाना
हो
तो
पहले
थोड़ा
शंकर
होना
पड़ता
है
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Sanskar 'Sanam'
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चुरा
नहीं
सकता
कोई
मेरी
ग़ज़लें
तुझको
लिखना
सिर्फ़
मुझे
ही
आता
है
Sanskar 'Sanam'
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करके
थोड़ी
हिम्मत
लिखना
चाहता
हूँ
नेताओं
को
लानत
लिखना
चाहता
हूँ
जिसको
पढ़कर
सारे
तुझ
सेे
प्यार
करें
तेरी
ऐसी
सीरत
लिखना
चाहता
हूँ
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Sanskar 'Sanam'
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कि
प्यासे
को
समुंदर
दिख
रहा
है
ये
क्यूँ
शहरों
में
लश्कर
दिख
रहा
है
मैं
उसको
जान
अपनी
मानता
था
पर
अब
उसका
भी
तेवर
दिख
रहा
है
ये
सब
नेता
जो
जनता
से
बने
हैं
उन्हें
जनता
में
नौकर
दिख
रहा
है
है
वो
अपने
अहम
में
चूर
ऐसा
उसे
हर
शख़्स
कमतर
दिख
रहा
है
थका
हारा
वो
दफ़्तर
से
है
आया
उसे
तो
बस
वो
बिस्तर
दिख
रहा
है
कि
गौरी
ने
जो
दर्पन
में
है
देखा
उसे
तो
ख़ुद
में
शंकर
दिख
रहा
है
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Sanskar 'Sanam'
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मैं
तेरी
तस्वीर
लगाकर
सीने
से
अक्सर
बैंड
सनम
के
गाने
सुनता
हूँ
Sanskar 'Sanam'
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