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Sanskar 'Sanam'
gaav tarakki karte karte shahar hua
gaav tarakki karte karte shahar hua | गाँव तरक्की करते करते शहर हुआ
- Sanskar 'Sanam'
गाँव
तरक्की
करते
करते
शहर
हुआ
शहर
वो
पिछड़ा
लेकिन
गाँव
न
हो
पाया
- Sanskar 'Sanam'
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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दिल
की
बस्ती
पुरानी
दिल्ली
है
जो
भी
गुज़रा
है
उसने
लूटा
है
Bashir Badr
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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ये
दिल
मलूल
भी
कम
है
उदास
भी
कम
है
कई
दिनों
से
कोई
आस
पास
भी
कम
है
हमें
भी
यूँं
ही
गुजरना
पसंद
है
और
फिर
तुम्हारा
शहर
मुसाफ़िर-शनास
भी
कम
है
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Farhat Abbas Shah
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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नई
नई
आँखें
हों
तो
हर
मंज़र
अच्छा
लगता
है
कुछ
दिन
शहर
में
घू
में
लेकिन
अब
घर
अच्छा
लगता
है
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Nida Fazli
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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मुझ
को
कहानियाँ
न
सुना
शहर
को
बचा
बातों
से
मेरा
दिल
न
लुभा
शहर
को
बचा
Taimur Hasan
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इक
लड़के
की
सारी
ग़लती
होती
है
फिर
सब
लड़के
वैसे
ही
कहलाते
हैं
Sanskar 'Sanam'
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मोहब्बत
काम
अच्छा
कर
रही
है
मुझे
अब
सब्र
करना
आ
रहा
है
Sanskar 'Sanam'
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करके
थोड़ी
हिम्मत
लिखना
चाहता
हूँ
नेताओं
को
लानत
लिखना
चाहता
हूँ
जिसको
पढ़कर
सारे
तुझ
सेे
प्यार
करें
तेरी
ऐसी
सीरत
लिखना
चाहता
हूँ
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Sanskar 'Sanam'
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जानता
हूँ
मैं
कि
वो
आएगी
सब
कुछ
छोड़कर
जानता
हूँ
मैं
कि
ये
मेरा
हँसी
सा
ख़्वाब
है
Sanskar 'Sanam'
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तुम्हारा
ख़ास
दिन
था
इसलिए
ही
मैं
कुछ
पैसे
बचा
कर
रख
रहा
था
तुम्हारे
एक
उस
तोहफ़े
के
ख़ातिर
सभी
ख़र्चे
बचा
कर
रख
रहा
था
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Sanskar 'Sanam'
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