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Sandeep Gandhi Nehal
mere hisse hi to gham ho raha hai
mere hisse hi to gham ho raha hai | मेरे हिस्से ही तो ग़म हो रहा है
- Sandeep Gandhi Nehal
मेरे
हिस्से
ही
तो
ग़म
हो
रहा
है
यूँँं
बे
-
ईमान
मौसम
हो
रहा
है
यहाँ
हम
मौत
के
दर
पर
खड़े
हैं
वहाँ
डोली
का
आलम
हो
रहा
है
उधर
रस्में
निभाई
जा
रही
हैं
इधर
मेरा
ही
मातम
हो
रहा
है
मेरी
सुन
रूह
तू
आज़ाद
हो
जा
किसी
दूजे
का
जानम
हो
रहा
है
हमारी
आज,
बिछड़न
की
घड़ी
है
तुम्हारा
आज
संगम
हो
रहा
है
- Sandeep Gandhi Nehal
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मेरे
ख़्वाब
मेरी
ख़ुशी
का
हुआ
क्या
लबों
की
मेरी
इन
हँसी
का
हुआ
क्या
बड़ी
ख़ूब-सूरत
थी
ये
ज़िंदगी
तो
पता
ना
चला
ज़िंदगी
का
हुआ
क्या
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Sandeep Gandhi Nehal
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शा'इरी
में
बयाँ
करूँगा
सब
इश्क़
खुल
के
जता
न
पाऊँगा
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जो
इस
दुनिया
से
डरते
हैं
ख़ाक
मोहब्बत
करते
हैं
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यार
मेरा
रूठा
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
प्यार
मेरा
टूटा
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
सब
दिखावा
है
और
सब
के
सब
झूटे
ये
जहाँ
है
झूटा
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
मैं
भरोसा
किया
उसी
पर
और,
वो
ज़िंदगी
ही
फूँका
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
साथ
चलने
के
वायदे
थे
हर
क़दम
यूँँं
मिला
ना
धोका
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
मैं
मोहब्बत
करता
रहा
"नेहाल"
वो
इक
दफ़ा
ना
सोचा
ग़ज़ल
कहनी
पड़ी
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Sandeep Gandhi Nehal
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इक
हसीं
सा
गुनाह
करते
हैं
साथ
आओ
निबाह
करते
हैं
अस्ल
में
तो
है
ही
नहीं
मुमकिन
ख़्वाब
में
ही,
विवाह
करते
हैं
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Sandeep Gandhi Nehal
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