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Sandeep dabral 'sendy'
vo chhod gaya hai saath hamaara kar ke nam aañkhen
vo chhod gaya hai saath hamaara kar ke nam aañkhen | वो छोड़ गया है साथ हमारा कर के नम आँखें
- Sandeep dabral 'sendy'
वो
छोड़
गया
है
साथ
हमारा
कर
के
नम
आँखें
कि
हिफ़ाज़त
जिसकी
गाहे
करती
थी
हर-दम
आँखें
- Sandeep dabral 'sendy'
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घूमता
रहता
है
हर
वक़्त
मेरी
आँखों
में
एक
चेहरा
जो
कई
साल
से
देखा
भी
नहीं
Riyaz Tariq
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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ऐसे
इक़रार
में
इंकार
के
सौ
पहलू
हैं
वो
तो
कहिए
कि
लबों
पे
न
तबस्सुम
आए
Asad Bhopali
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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गर
इक
बार
मुयस्सर
ये
गाल
हो
जाएँ
हम
भी
गुलाल
के
हम-ख़याल
हो
जाएँ
Sandeep dabral 'sendy'
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ग़ुस्सा
माँ
का
इक
बच्चा
जितना
सह
सकता
है
कोई
तुम
सेे
भी
उतना
ग़ुस्सा
रह
सकता
है
आँखें
तुम्हारी
उकसाती
हैं
बातें
करने
को
वरना
कौन
तुम्हारे
आगे
क्या
कह
सकता
है
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Sandeep dabral 'sendy'
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ये
न
सोचो
कि
मुझको
ख़बर
है
नहीं
सठ
की
मुफलिसों
पर
नज़र
है
नहीं
हाल
ख़स्ता
हमारा
यहाँ
देखिए
गाँव
मेरा
बड़ा
सा
शहर
है
नहीं
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Sandeep dabral 'sendy'
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मज़हब
पर
लड़ने
वालों
होश
में
आ
जाओ
वरना
छोटा-मोटा
झगड़ा
इक
दिन
सरहद
में
बदलेगा
Sandeep dabral 'sendy'
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अब
की
बार
नहीं
आएगी
झाँसे
में
आवाम
मियाँ
तुम
पहुँचा
दो
सत्ता
के
गलियारों
तक
संदेश
मिरा
Sandeep dabral 'sendy'
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