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Sandeep dabral 'sendy'
rukh aisa palta hai ek kahaanii men
rukh aisa palta hai ek kahaanii men | रुख़ ऐसा पलटा है एक कहानी में
- Sandeep dabral 'sendy'
रुख़
ऐसा
पलटा
है
एक
कहानी
में
किरदार
मर
गए
दो
भरी
जवानी
में
ऐसे
विचलित
हुई
कहानी
पूछो
मत
फेंक
दिया
हो
जैसे
पत्थर
पानी
में
- Sandeep dabral 'sendy'
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जल
चुका
है
जिस्म
मेरा
राख
हूँ
मैं
पर
मुझे
अब
भी
मिली
राहत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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गिले
शिकवे
ज़रूरी
हैं
अगर
सच्ची
मुहब्बत
है
जहाँ
पानी
बहुत
गहरा
हो
थोड़ी
काई
रहती
है
Munawwar Rana
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तुम्हारा
सिर्फ़
हवाओं
पे
शक
गया
होगा
चराग़
ख़ुद
भी
तो
जल
जल
के
थक
गया
होगा
Zubair Ali Tabish
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रोते
बच्चे
पूछ
रहे
हैं
मम्मी
से
कितना
पानी
और
मिलाया
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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चूमने
की
रस्म
बाक़ी
है
अभी
भी
डर
है
पहले
देह
को
उबटन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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जल
बुझूँगा
भड़क
के
दम
भर
में
मैं
हूँ
गोया
दिया
दिवाली
का
Nadir Shahjahanpuri
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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बूढ़ों
से
अनुभव
बच्चों
से
दु'आ
लेते
इश्क़
के
उस्तादों
से
इल्म
कमा
लेते
इतने
ही
आतुर
थे
अगर
झलक
भर
के
आँख
बिछानी
थी
सो
आँख
बिछा
लेते
कैसे
'आशिक़
हो
जो
आए
ख़ाली
हाथ
नज़र
न
मिल
पाई
तो
हाथ
मिला
लेते
राज़
सभी
खुलते
हैं
पीने
के
ही
बाद
जाम
पिलाने
थे
सो
जाम
पिला
लेते
शौक़
अगर
इतना
था
साथ
में
रखने
का
तो
बटुए
में
इक
तस्वीर
सजा
लेते
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Sandeep dabral 'sendy'
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है
देखने
लायक़
दुनिया
में
क्या
क्या
नइँ
लेकिन
मोबाइल
से
नज़र
हटे
तो
देखें
फिर
दुनिया
Sandeep dabral 'sendy'
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जो
याँ
दर्द
छिपा
कर
मुस्काते
हैं
और
न
किसी
से
कुछ
पाते
हैं
उनका
दर्द
निहाँ
सब
को
दिख
जाए
तुम
ऐसी
बीनाई
देना
Sandeep dabral 'sendy'
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हीरे
की
ख़्वाहिश
में
पारस
जो
खोया
है
तुम
ये
सोच
के
ख़ुद
पे
बेहद
रोष
करोगे
Sandeep dabral 'sendy'
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सिर्फ़
तुम
सेे
ही
नहीं
वो
ऐसा
सब
से
बोलते
हैं
मेरे
घर
के
लोग
सब
के
सब
अदब
से
बोलते
हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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