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Sandeep dabral 'sendy'
kabhi khushi vishaad ghu
kabhi khushi vishaad ghu | कभी ख़ुशी, विषाद घू
- Sandeep dabral 'sendy'
कभी
ख़ुशी,
विषाद
घू
में
चाक
है
ये
ज़िंदगी
उतार
और
चढ़ाव
बिन
तो
ख़ाक
है
ये
ज़िंदगी
- Sandeep dabral 'sendy'
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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बस
एक
मोड़
मिरी
ज़िंदगी
में
आया
था
फिर
इस
के
बाद
उलझती
गई
कहानी
मेरी
Abbas Tabish
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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तुम्हारे
बाद
आए
हैं
बहुत
सारे
मगर
दिल
को
न
भाए
हैं
यहाँ
कोई
Sandeep dabral 'sendy'
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बीज
नफ़रत
के
ज़मीं
पर
बो
दिए
हैं
लोगों
ने
सो
अब
मोहब्बत
के
लिए
मैं
आसमाँ
को
ढूँढता
हूँ
Sandeep dabral 'sendy'
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मैं
चाहता
नहीं
मुश्किल
में
उन्हें
गिरा
दूँ
वरना
बदन
के
उनके
मैं
सारे
तिल
गिना
दूँ
Sandeep dabral 'sendy'
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इस-क़दर
खा
बैठी
तन्हाई
जवानी
याँ
हमारी
सिर्फ़
दो
मिसरों
में
ही
सिमटी
कहानी
याँ
हमारी
Sandeep dabral 'sendy'
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लौटने
से
तिरे
इतना
महके
कि
देख
तितली
और
भँवरों
ने
राब्ता
कर
लिया
गुल-ए-तर
मेरे
ग़ामों
में
झरने
लगे
देख
ख़ारों
ने
भी
रास्ता
कर
लिया
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Sandeep dabral 'sendy'
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