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Sandeep dabral 'sendy'
kabhi-kabhaar tum mizaaj padh liya karo mira
kabhi-kabhaar tum mizaaj padh liya karo mira | कभी-कभार तुम मिज़ाज पढ़ लिया करो मिरा
- Sandeep dabral 'sendy'
कभी-कभार
तुम
मिज़ाज
पढ़
लिया
करो
मिरा
अगर
बयाँ
ही
करना
है
तो
चुप्पी
है
न
काम
की
- Sandeep dabral 'sendy'
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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ये
शबनमी
लहजा
है
आहिस्ता
ग़ज़ल
पढ़ना
तितली
की
कहानी
है
फूलों
की
ज़बानी
है
Bashir Badr
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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हम
ऐसी
कुल
किताबें
क़ाबिल-ए-ज़ब्ती
समझते
हैं
कि
जिन
को
पढ़
के
लड़के
बाप
को
ख़ब्ती
समझते
हैं
Akbar Allahabadi
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बेटियाँ
बाप
की
आँखों
में
छुपे
ख़्वाब
को
पहचानती
हैं
और
कोई
दूसरा
इस
ख़्वाब
को
पढ़
ले
तो
बुरा
मानती
हैं
Iftikhar Arif
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उतारा
दिल
के
वरक़
पर
तो
कितना
पछताया
वो
इंतिसाब
जो
पहले
बस
इक
किताब
पे
था
Aanis Moin
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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नज़ारा
जो
है
यह
इस
पल
वो
अगले
पल
नहीं
होगा
अभी
जी
भर
के
जी
लो
क्या
पता
यह
कल
नहीं
होगा
Sandeep dabral 'sendy'
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सुब्ह
होने
में
ज़माने
लगते
हैं
हिज्र
में
जब
दर्द
खाने
लगते
हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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दिल
में
हमारे
अब
तुम्हारी
यादों
का
खाता
न
है
सब
झूठ
कहते
हैं
कि
अब
याँ
आपसी
नाता
न
है
आओ
कभी
मिलने
तो
थोड़ा
वक़्त
लेकर
आना
तुम
हमको
कलाई
पर
यूँँ
नज़रें
फेरना
भाता
न
है
होगी
हमारे
बीच
वार्तालाप
इत्मीनान
से
यूँँ
शीघ्रता
से
आँखें
पढ़ना
अब
हमें
आता
न
है
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करके
भी
यहाँ
रत्तीभर
न
कर
सकोगे
कुछ
पूजे
देवता
ही
जब
दाग़दार
निकलेंगे
Sandeep dabral 'sendy'
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मेरे
महबूब
के
क़रीब
बहुत
शहर
में
हैं
भरे
रक़ीब
बहुत
है
ज़रूरत
नहीं
मुझे
अदू
की
याँ
हैं
साहब
मिरे
हबीब
बहुत
मुद्दों
की
नेता
क्यूँ
करें
चिंता
उस
लिए
हैं
यहाँ
ग़रीब
बहुत
मर
गए
वो
कमी
से
उनकी
जो
कहते
थे
हैं
मियाँ
तबीब
बहुत
बहर
में
क्यूँ
नहीं
अभी
ग़ज़लें
पास
मेरे
तो
हैं
अदीब
बहुत
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Sandeep dabral 'sendy'
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