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Sandeep dabral 'sendy'
chaahat hoti dono ki pal bhar men dono ban jaayen moorat
chaahat hoti dono ki pal bhar men dono ban jaayen moorat | चाहत होती दोनों की पल भर में दोनों बन जाएँ मूरत
- Sandeep dabral 'sendy'
चाहत
होती
दोनों
की
पल
भर
में
दोनों
बन
जाएँ
मूरत
जब
दो
प्रेमी
जोड़े
वक़्त
जुदाई
के
आख़िर
गले
मिलते
हैं
- Sandeep dabral 'sendy'
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मगर
गुज़ारनेवालों
के
दिन
गुज़रते
हैं
तेरे
फ़िराक़
में
यूँँ
सुबह-ओ-शाम
करते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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यूँँ
तो
वो
इत्रदान
था
लेकिन
ये
क्या
हुआ
टूटा
तो
एक
सम्त
भी
ख़ुशबू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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हैं
बुझाने
में
लगे
सब
जन
दिए
को
कैसे
बाती
है
बढ़ानी
लिख
रहा
हूँ
Sandeep dabral 'sendy'
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पल
एक
नहीं
लगता
है
गगरी
को
आधा
होने
में
कि
बिगड़
जाती
हैं
बातें
भी
अक्सर
ज़्यादा
होने
में
Sandeep dabral 'sendy'
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सारी
गणित
बदल
गई
इक
माँ
के
जाने
से
ता'लीम
लेना
व्यर्थ
है
अब
याँ
घटाव
पर
Sandeep dabral 'sendy'
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शोभा
ऐसे
ही
न
बढ़ाता
है
याँ
सोने
का
तमग़ा
इस
सोने
की
ख़ातिर
सोने
जैसा
तपना
पड़ता
है
Sandeep dabral 'sendy'
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कुछ
और
देना
चाहे
नइँ
देना
लेकिन
इतना
सा
इलाही
देना
याँ
सबको
सरवन
जैसा
बेटा
और
लक्ष्मण
जैसा
भाई
देना
जो
याँ
दर्द
छिपा
कर
मुस्काते
हैं
और
न
किसी
से
कुछ
पाते
हैं
उनका
दर्द
निहाँ
सब
को
दिख
जाए
तुम
ऐसी
बीनाई
देना
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Sandeep dabral 'sendy'
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