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Sandeep dabral 'sendy'
keval itni si inaayat ho jaa.e
keval itni si inaayat ho jaa.e | केवल इतनी सी इनायत हो जाए
- Sandeep dabral 'sendy'
केवल
इतनी
सी
इनायत
हो
जाए
याँ
उसको
मेरी
आदत
हो
जाए
आसान
नहीं
भू
नभ
का
इक
होना
कुछ
कर
मौला
वो
इक
मत
हो
जाए
होने
को
तो
हो
सकता
है
कुछ
भी
पर
उसको
मुझ
सेे
मुहब्बत
हो
जाए
उस
गुल
से
अपना
घर
महकाना
है
चाहे
दुनिया
से
बग़ावत
हो
जाए
उसको
पाने
की
ख़ातिर
अब
चाहे
इक
दो
सपनों
की
शहादत
हो
जाए
महफ़ूज़
रखूँगा
अपनी
तिजोरी
में
इक
बार
वो
मेरी
दौलत
हो
जाए
झुमके
पायल
चूड़ी
बिंदी
काजल
याँ
नाम
मिरे
उसकी
नथ
हो
जाए
- Sandeep dabral 'sendy'
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मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
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जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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मैं
सुख़न
में
हूँ
उस
जगह
कि
जहाँ
साँस
लेना
भी
शा'इरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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आँखें
तुम्हारी
उकसाती
हैं
बातें
करने
को
वरना
कौन
तुम्हारे
आगे
कुछ
कह
सकता
है
Sandeep dabral 'sendy'
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और
किसी
का
हो
न
सका
उसका
होने
के
बाद
यारों
उसने
मुझको
याँ
चाहा
है
क़ज़ा
की
तरह
Sandeep dabral 'sendy'
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हम
चाहते
हैं
जिनको
वो
पास
नहीं
रहते
दाइम
किसी
की
ख़ातिर
हम
ख़ास
नहीं
रहते
अब
लोग
बदलने
में
याँ
वक़्त
लगाते
नइँ
ख़ुद-ग़र्ज़
ज़माने
में
इख़्लास
नहीं
रहते
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Sandeep dabral 'sendy'
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यार
मिरे
कहते
हैं
कि
तुमने
उस
में
ऐसा
क्या
देखा
मैंने
उसकी
आँखों
में
यारों
फ़र्दा
अपना
देखा
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Sandeep dabral 'sendy'
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कभी-कभार
तुम
मिज़ाज
पढ़
लिया
करो
मिरा
अगर
बयाँ
ही
करना
है
तो
चुप्पी
है
न
काम
की
Sandeep dabral 'sendy'
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