bahre saare ho ga.e sunta na koi peer ko | बहरे सारे हो गए सुनता न कोई पीर को

  - Sandeep dabral 'sendy'
बहरेसारेहोगएसुनताकोईपीरको
ख़ुदबढ़ानासीखलोअबअपनीघटतीचीरको
बेचनाईमानबेहदसहलहैउनकेलिए
बेचनेजोयाँलगेहैंबोतलोंमेंनीरको
माँकाचेहराआँखोंमेंजाताहैवर्नामैंभी
तोड़करआताचलाइसज़ीस्तकीज़ंजीरको
आजकलउनसेेमिरामिलनातोहोपातानहीं
परगुज़ाराकरताहूँमैंचूमकरतस्वीरको
भूखाहूँसोख़्वाबरोटीकेहीआएँगेयहाँ
क्यूँँपरेशाँकरतेहोतुमपूछकरता'बीरको
पलमेंतोलापलमेंमाशालोगजोहोतेयहाँ
पढ़नामुश्किलहैबहुतउनकीमियाँतासीरको
दिखरहीहैसारीमछलीलोगोंकोलेकिनमुझे
भेदनाहैआँखकोबसयेबतायातीरको
जोबनातेहैंनहींक़िस्मतकोमेहनतकाग़ुलाम
अंतमेंवोलोगदेतेदोषफिरतक़दीरको
हैंक़िताबेंयाँहज़ारोंवाचनेकेवास्ते
परग़ज़लकहनेकोपढ़ताहूँमैंग़ालिब,मीरको
  - Sandeep dabral 'sendy'
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