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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
udna hai ab ghazal ke falak par mujhe
udna hai ab ghazal ke falak par mujhe | उड़ना है अब ग़ज़ल के फ़लक पर मुझे.
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
उड़ना
है
अब
ग़ज़ल
के
फ़लक
पर
मुझे.
मैं
परिंदा
हूँ
आजाद
से
ख़याल
का
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ख़याल
था
कि
ये
पथराव
रोक
दें
चल
कर
जो
होश
आया
तो
देखा
लहू
लहू
हम
थे
Rahat Indori
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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तुझे
ख़याल
नहीं
है
सो
हम
बढ़ा
रहे
हैं
फिर
इक
दफ़ा
तेरी
ज़ानिब
क़दम
बढ़ा
रहे
हैं
बहुत
से
आए
तुझे
जीतने
की
ख़्वाहिश
में
हम
एक
कोने
में
बैठे
रक़म
बढ़ा
रहे
हैं
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Zahid Bashir
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बादल
आए
हैं
घिर
गुलाल
के
लाल
कुछ
किसी
का
नहीं
किसी
को
ख़याल
Rangin Saadat Yaar Khan
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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गो
मैं
रहा
रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन
तिरे
ख़याल
से
ग़ाफ़िल
नहीं
रहा
Mirza Ghalib
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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काश
बढ़
जाए
ज़रा
सा
रात
में
सर्दी
का
मौसम
रूठ
के
सोई
है
वो,फिर
से
क़रीब
आ
जाए
शायद
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ता-उम्र
गुज़ारी
हमने
सबको
हँसाने
में
फिर
मौत
से
अपनी
सन्नाटा
किया
है
यारों
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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मुझ
सेे
कभी
मिलना
सनम
मिस
यूँ
बहुत
सारा
सनम
मिस
यूँ
टू
कह
दो
आप
भी
छोड़ो
यूँँ
शर्माना
सनम
उफ़
ये
खुली
ज़ुल्फ़ें
तिरी
अब
बाँध
लो
गजरा
सनम
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
आज
क्यूँ
आख़िर
हुआ
है
क्या
सनम
मजनूँ
बनाकर
अब
मुझे
तुम
भी
बनो
लैला
सनम
फिर
तुम
लगोगी
इक
दुल्हन
पहनो
नया
जोड़ा
सनम
जो
है
मोहब्बत
आपकी
कल
तक
हमारा
था
सनम
धोका
दिया
तुमने
मुझे
फिर
मार
भी
डाला
सनम
मिलना
न
हो
मुमकिन
अगर
तुम
ख़्वाब
में
आना
सनम
लड़का
तो
अच्छा
है
शफ़क़
फिर
भी
नहीं
मिलता
सनम
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ज़िन्दगी
बस
वो
ज़िन्दगी
होगी
इश्क़
कर
के
जो
कट
रही
होगी
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ज़मीं
सर
पे
उठा
लूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
गगन
को
भी
कुचल
दूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
भला
औक़ात
क्या
इस
चाँद
की
उस
चाँद
के
आगे
हज़ारों
चाँद
वारूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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