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Samar Pradeep
kashtii par aisa bhaar na ho
kashtii par aisa bhaar na ho | कश्ती पर ऐसा भार न हो
- Samar Pradeep
कश्ती
पर
ऐसा
भार
न
हो
जिस
सेे
ये
दरिया
पार
न
हो
टूटो
तो
इतना
ही
टूटो
जितने
से
दिल
बीमार
न
हो
फूल
बिछाओ
राह
में
उस
की
याद
रहे
कोई
ख़ार
न
हो
ग़लती
हो
भी
तो
ऐसी
हो
ग़लती
वो
जो
हर
बार
न
हो
तामीर
करो
घर,
घर
जैसा
घर
वो
जिस
में
दीवार
न
हो
- Samar Pradeep
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तन्हाइयाँ
तुम्हारा
पता
पूछती
रहीं
शब-भर
तुम्हारी
याद
ने
सोने
नहीं
दिया
Unknown
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जब
बुलंदी
का
गुमाँ
था
तो
नहीं
याद
आई
अपनी
परवाज़
से
टूटे
तो
ज़मीं
याद
आई
वही
आँखें
कि
जो
ईमान-शिकन
आँखें
हैं
उन्हीं
आँखों
की
हमें
दावत-ए-दीं
याद
आई
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Subhan Asad
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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ख़ुद
को
मसरूफ़
किए
रखने
की
कोशिश
करना
क्या
तेरी
याद
के
ज़ुमरे
में
नहीं
आता
है
Jawwad Sheikh
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ज़रा
देर
बैठे
थे
तन्हाई
में
तिरी
याद
आँखें
दुखाने
लगी
Adil Mansuri
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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इतना
तो
याद
है
इक
वा'दा
किया
था
लेकिन
हम
ने
क्या
वा'दा
किया
था
हमें
ये
याद
नहीं
Bismil Dehlavi
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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तेरे
यादों
की
छोटी
खिड़कियों
से
तुझे
हर
रोज़
जी
भर
देखता
हूँ
Umesh Maurya
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एक
मंज़र
जो
धुआँ
होता
हुआ
शम्अ-ए-उम्मीद
ले
जाता
हुआ
लौटना
पड़ता
है
इक
तै
वक़्त
पे
शाम
फिर
ढ़ल
जाएगा
ढ़लता
हुआ
जो
अना
को
ताक
पर
रख
के
मिले
ख़ुश
हुआ
हूँ
मैं
उसे
मिलता
हुआ
फूंक
के
रखता
है
जो
हर
इक
कदम
चाल
चलता
है
बहुत
बरता
हुआ
पूछ
लेंगे
हम
ख़ुदास
भी
कभी
क्या
बनाना
था
ये
क्या
बनता
हुआ
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Samar Pradeep
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मेरे
दुख
का
गर
कासा
टूटे
मुमकिन
है
रब
का
पासा
टूटे
दुख
के
सहरा
में
भी
बारिश
हो
दुख
में
जब
कोई
प्यासा
टूटे
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Samar Pradeep
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