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Samar Pradeep
ek manzar jo dhuaa hota hua
ek manzar jo dhuaa hota hua | एक मंज़र जो धुआँ होता हुआ
- Samar Pradeep
एक
मंज़र
जो
धुआँ
होता
हुआ
शम्अ-ए-उम्मीद
ले
जाता
हुआ
लौटना
पड़ता
है
इक
तै
वक़्त
पे
शाम
फिर
ढ़ल
जाएगा
ढ़लता
हुआ
जो
अना
को
ताक
पर
रख
के
मिले
ख़ुश
हुआ
हूँ
मैं
उसे
मिलता
हुआ
फूंक
के
रखता
है
जो
हर
इक
कदम
चाल
चलता
है
बहुत
बरता
हुआ
पूछ
लेंगे
हम
ख़ुदास
भी
कभी
क्या
बनाना
था
ये
क्या
बनता
हुआ
- Samar Pradeep
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शराफ़त
ने
मुझको
कहीं
का
न
छोड़ा
रक़ीब
अपने
ख़त
मुझ
सेे
लिखवा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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जीत
ले
दुनिया
को
बिन
हथियार
के
कृष्ण
की
बंसी
में
ऐसे
राग
हैं
Alankrat Srivastava
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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हम
अपनी
जान
के
दुश्मन
को
अपनी
जान
कहते
हैं
मोहब्बत
की
इसी
मिट्टी
को
हिंदुस्तान
कहते
हैं
Rahat Indori
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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देश
मेरा
जंग
तो
जीता
मगर
लौट
कर
आया
नहीं
बेटा
मेरा
Divy Kamaldhwaj
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कश्ती
पर
ऐसा
भार
न
हो
जिस
सेे
ये
दरिया
पार
न
हो
टूटो
तो
इतना
ही
टूटो
जितने
से
दिल
बीमार
न
हो
फूल
बिछाओ
राह
में
उस
की
याद
रहे
कोई
ख़ार
न
हो
ग़लती
हो
भी
तो
ऐसी
हो
ग़लती
वो
जो
हर
बार
न
हो
तामीर
करो
घर,
घर
जैसा
घर
वो
जिस
में
दीवार
न
हो
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Samar Pradeep
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मेरे
दुख
का
गर
कासा
टूटे
मुमकिन
है
रब
का
पासा
टूटे
दुख
के
सहरा
में
भी
बारिश
हो
दुख
में
जब
कोई
प्यासा
टूटे
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Samar Pradeep
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