zindagi se maat khaakar so ga.e | ज़िंदगी से मात खाकर सो गए

  - SALIM RAZA REWA
ज़िंदगीसेमातखाकरसोगए
वोचराग़-ए-जाँबुझाकरसोगए
धूपकाबिस्तरलगाकरसोगए
छाँवसिरहानेदबाकरसोगए
गुफ़्तगूकीदिलमेंख़्वाहिशथीमगर
वोमेरेख़्वाबोंमेंआकरसोगए
तंगथीचादरतोहमनेयूँँकिया
पाँवसीनेसेलगाकरसोगए
उनकीनींदोंपरनिछावरमेरेख़्वाब
जोज़मानेकोजगाकरसोगए
बे-कसीमेंऔरक्याकरतेरज़ा
ख़ुदकोहीसमझा-बुझाकरसोगए
  - SALIM RAZA REWA
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