हुस्न जब ज़ेवर-ए-उल्फ़त से सँवर जाता है

  - SALIM RAZA REWA
हुस्नजबज़ेवर-ए-उल्फ़तसेसँवरजाताहै
नूरबनकरवोदिल-ओ-जाँमेंउतरजाताहै
दिलकिसीऔरकेपीछेनहींचलताहरगिज़
दिलउधरजाताहैमहबूबजिधरजाताहै
चोटखाताहैमोहब्बतमेंकिसीकाजबदिल
इश्क़काभूततोदोदिनमेंउतरजाताहै
आजभीउसकोमोहब्बतहैयक़ीननमुझसेे
जबभीमिलताहैवोपलभरकोठहरजाताहै
वोथिरकताहैलहूबनकेमेरीनस-नसमें
औरफिरमेरेख़यालोंमेंबिखरजाताहै
लबपेहल्कासातबस्सुमभीअगरजाए
हुस्नफिरउसकाबहारोंसानिखरजाताहै
ऐसेइंसाँपेरज़ाकैसेभरोसाकरलें
करकेवा'दाजोहमेशाहीमुकरजाताहै
  - SALIM RAZA REWA
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