ग़मों की गर्द ने ढक ली है हर ख़ुशी मेरी

  - SALIM RAZA REWA
ग़मोंकीगर्दनेढकलीहैहरख़ुशीमेरी
सिसक-सिसककेगुज़रतीहैज़िंदगीमेरी
मैंमुस्कुराभीदियाटूटकरबिखरभीगया
उसेपताहीनहींहैयेसादगीमेरी
मैंअपनेग़मकोछुपालूँगाइसहुनरकेसाथ
नज़रआएगीदुनियाकोबेबसीमेरी
बहारआईतोशाख़ोंसेफूलझड़नेलगे
हैमुझकोडरमुझेखाएताज़गीमेरी
जोअश्कबनकेछलकतीरहीनिगाहोंसे
उसीकोलोगसमझतेरहेख़ुशीमेरी
ग़मोंकेशोरसेदहलाहैऐसादिलमेरा
डरी-डरीसीरहाकरतीहैख़ुशीमेरी
रज़ायहीतोमुक़द्दरकीमेहरबानीहै
हुईख़त्मयेतकलीफ़-ए-आशिक़ीमेरी
  - SALIM RAZA REWA
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