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Sahir Ludhianvi
main zindagi ka saath nibhaata chala gaya
main zindagi ka saath nibhaata chala gaya | मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
- Sahir Ludhianvi
मैं
ज़िंदगी
का
साथ
निभाता
चला
गया
हर
फ़िक्र
को
धुएँ
में
उड़ाता
चला
गया
- Sahir Ludhianvi
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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जो
न
खेली
होली
'अमृत'
के
साथ
में
हाथों
में
दीवाली
तक
गुलाल
रहेगा
Amritanshu Sharma
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अहबाब
मेरा
कितना
ज़ियादा
बदल
गया
तू
पूछता
है
मुझ
से
भला
क्या
बदल
गया
अब
तू
तड़ाक
करता
है
वो
बात
बात
पर
अब
उस
के
बात
चीत
का
लहजा
बदल
गया
क़ुर्बत
में
उस
के
अच्छे
से
अच्छे
बदल
गए
जो
मैं
भी
उस
के
पास
जा
बैठा
बदल
गया
पहले
तो
साथ
रहने
की
हामी
बहुत
भरी
फिर
एक
रोज़
उस
का
इरादा
बदल
गया
लैला
बदल
गई
तो
गई
साथ
साथ
ही
मजनूँ
बदल
गया
ये
ज़माना
बदल
गया
तस्वीर
अर्से
बाद
बदलती
है
सब्र
रख
ऐसा
नहीं
न
होता
कि
सोचा
बदल
गया
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shaan manral
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जाने
अब
वो
किसके
साथ
निकलता
होगा
रातों
को
जाने
कौन
लगाता
होगा
दो
घंटे
तैयारी
में
Danish Naqvi
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Ataul Hasan
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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फिर
खो
न
जाएँ
हम
कहीं
दुनिया
की
भीड़
में
मिलती
है
पास
आने
की
मोहलत
कभी
कभी
Sahir Ludhianvi
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मैं
ज़िंदगी
का
साथ
निभाता
चला
गया
हर
फ़िक्र
को
धुएँ
में
उड़ाता
चला
गया
बर्बादियों
का
सोग
मनाना
फ़ुज़ूल
था
बर्बादियों
का
जश्न
मनाता
चला
गया
जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
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Sahir Ludhianvi
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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