किसतरहकीवहशतोंमेंमुब्तलाहूॅंरातदिन
सोचताहूॅंआख़िरशक्यासोचताहूॅंरातदिन
फ़लसफ़ायेशा'इरीयेसबइसीकोशिशमेंहैं
एकग़मजिसकोभुलानेमेंलगाहूॅंरातदिन
शर्मभीआतीहैपरइकबातकहनीथीतुम्हें
मैंतसव्वुरमेंतुम्हेंहीचूमताहूॅंरातदिन
बसइसीउम्मीदपे'सागर'वोआजाएकभी
ज़ख़्मचेहरेपरलगाएमैंसजाहूॅंरातदिन