jab se ghazal ko vo padha karne lagii | जब से ग़ज़ल को वो पढ़ा करने लगी

  - Sagar Sahab Badayuni
जबसेग़ज़लकोवोपढ़ाकरनेलगी
वोबे-वफ़ाभीफिरवफ़ाकरनेलगी
क्यामिलगयाउसकोमिरेघरकापता
क्याअबउदासीघरपताकरनेलगी
जाकरकहींअबदिनबदलनेवालेथे
क़िस्मतमिरीफिरमसअलाकरनेलगी
तर्क-ए-त'अल्लुक़ख़त्मजबहोनेलगा
फिरहरकलीमुझसेेवफ़ाकरनेलगी
बे-वक़्तकिसनेखोलदींयेखिड़कियाँ
हरज़ख़्मकोताज़ाहवाकरनेलगी
क्याख़त्महोनेवालाहैक़िस्सामिरा
हरचीज़अबमुझसेेदग़ाकरनेलगी
  - Sagar Sahab Badayuni
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