jab bhi badan kii khaas zaroorat ka sochna | जब भी बदन की ख़ास ज़रूरत का सोचना

  - Sagar Sahab Badayuni
जबभीबदनकीख़ासज़रूरतकासोचना
इकबारअपनीपहलीमुहब्बतकासोचना
तुमकोभीहोरहीहैमुहब्बतयेचारसे
करतेरहोमगरज़राग़ैरतकासोचना
क्यातुमसभीलेजाओगीतस्वीरसाथमें
कुछतोमिरेगुज़ारेज़रूरतकासोचना
परवरदिगारदेखरहाहैतूयादरख
अपनेगुनाहऔरक़यामतकासोचना
आनीअगरहैकोईमुसीबततोआएगी
येक्याकिसारावक़्तमुसीबतकासोचना
बदलावजैसेकररहाहैख़ुदमेंआदमी
आनेकोरहीहैजोआफ़तकासोचना
वोग़मभरीजोग़ज़लेंसुनाताथाआजकल
अच्छीनहींहैउसकीतबीअतकासोचना
  - Sagar Sahab Badayuni
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