haalat-e-zaar ke maaron pe taras aata hai | हालत-ए-ज़ार के मारों पे तरस आता है

  - Sagar Sahab Badayuni
हालत-ए-ज़ारकेमारोंपेतरसआताहै
देखकरहाएबेचारोंपेतरसआताहै
यादमेंरक्खीथीचेहरेपेउखड़तीपरतें
भरनहींपाईदरारोंपेतरसआताहै
ज़ौनतुमकोरखायादभीजिनयारोंने
ज़ौनउनजैसेगँवारोंपेतरसआताहै
मुझकोयेग़मभीनहींकोईनहींमेरेसाथ
मुझकोतोतन्हासितारोंपेतरसआताहै
क्याहुएलोगवोपलकोंपेउठानेवाले
देखकरसूनीमज़ारोंपेतरसआताहै
  - Sagar Sahab Badayuni
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