jab bhi zaKHmon pe mire sard hawa lagti hai | जब भी ज़ख़्मों पे मिरे सर्द हवा लगती है

  - Sagar Sahab Badayuni
जबभीज़ख़्मोंपेमिरेसर्दहवालगतीहै
दूरसेआतीहुईउसकीसदालगतीहै
जानकरज़ख़्मखुलेछोड़ेहैंमैंनेअपने
मुझकोमालूमहैदेरीसेदवालगतीहै
करनहींसकतेकभीआपभरोसाउसपे
शहरकीजिसकोभीइकबारहवालगतीहै
क्याकहींऔरभीजानाहैकिसीसेमिलने
बदलीबदलीसीतिरीआजअदालगतीहै
ज़िन्दगीपहलेपहललगतीहैसबकोअच्छी
ज़िंदगीबादमुहब्बतकेसज़ालगतीहै
कबसमझआतीहैतकलीफ़किसीकी'सागर'
ख़ुदपेजोगुज़रेतोतकलीफ़पतालगतीहै
  - Sagar Sahab Badayuni
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