gham ke milte hi likhte hain taazi ghazal | ग़म के मिलते ही लिखते हैं ताज़ी ग़ज़ल

  - Sabreen nizam
ग़मकेमिलतेहीलिखतेहैंताज़ीग़ज़ल
दिलकेज़ख़्मोंकीहैइककहानीग़ज़ल
हमकहपाएजोआपकेसामने
आपसेकहरहीहैहमारीग़ज़ल
येजोहमसेेछिपातेहोजज़्बातको
राज़खोलेगीइकदिनतुम्हारीग़ज़ल
हाँकिसीकीनहींकोईदरकारअब
बनगईहैहमारीयेसाथीग़ज़ल
सिर्फ़झुमकेपेतिलपरअटकनानहीं
इसकेआगेकीहैयेकहानीग़ज़ल
हैंकशिशउनकीबातोंमेंभीइसकदर
जैसेउतरीहोइकआसमानीग़ज़ल
  - Sabreen nizam
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