yuñ zindagi ko zer-o-zabar kar rahe hain ham | यूँँ ज़िंदगी को ज़ेर-ओ-ज़बर कर रहे हैं हम

  - Sabiha Sadaf
यूँँज़िंदगीकोज़ेर-ओ-ज़बरकररहेहैंहम
हरदिनहीगर्दिशोंमेंबसरकररहेहैंहम
मंज़िलकीहैतलाशमगरयेख़बरनहीं
काग़ज़कीकश्तियोंमेंसफ़रकररहेहैंहम
शबसँभलकितेरेअँधेरोंकीख़ैरहो
ख़ुदमेंतलाशनज्म-ओ-क़मरकररहेहैंहम
कुछहसरतोंकेक़ाफ़िलेकुछख़्वाहिशोंकेघर
बसख़्वाबख़्वाबहीमेंबसरकररहेहैंहम
ख़ुर्शेदहमकोतेरीतमाज़तकाडरनहीं
इकतुख़्म-ए-ना-तवाँकोशजरकररहेहैंहम
तूरब्ब-ए-काएनातहैपरवरदिगारहै
सज्देतुझेहीशाम-ओ-सहरकररहेहैंहम
हमनेतलाश-ए-इश्क़मेंहारीहैज़िंदगी
अहल-ए-जुनूँकोआजख़बरकररहेहैंहम
हैमक़्सद-ए-हयातकिमंज़िलमिले'सदफ़'
उसकीतलाशशाम-ओ-सहरकररहेहैंहम
  - Sabiha Sadaf
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