vafaa ke raaz se parda nahin uthaaungi | वफ़ा के राज़ से पर्दा नहीं उठाऊँगी

  - Sabeela Inam Siddiqui
वफ़ाकेराज़सेपर्दानहींउठाऊँगी
मैंदिलकेज़ख़्मतह-ए-दिलसेहीछुपाऊँगी
अगरतुम्हारीनिगाहोंमेंयेखटकताहै
सुनोमैंआजसेकाजलनहींलगाऊंगी
उदासदिलहोतोगुलशनभीआहभरताहै
येसचहैरोतेहुएदिलसेमुस्कुराऊँगी
जोमुझपेगुज़रीहैअश्कोंसेवोइबारतहै
जोनक़्शदिलमेंहैकैसेउसेमिटाऊँगी
हरएकबातकोसुनकरजोअन-सुनीकरदे
उसेमैंदर्दकीरूदादक्यासुनाऊँगी
कभीतोआएवोज़िंदगीमिराबनकर
क़समख़ुदाकीमैंराहोंकोभीसजाऊँगी
जोमेरेदिलकीसदाहीसुनसकातोफिर
उसेमैंनौहा-ए-दिलकिसतरहसुनाऊँगी
तुम्हारासाथमुक़द्दरमेंगरनहींहैलिखा
तोयादबनकेमैंदिलमेंकहींसमाऊँगी
जोख़्वाबदेखेहैंदिलउनसेक्यूँँउलझताहै
मैंअबयेफ़ल्सफ़ाशायदसमझपाऊँगी
वोजबमिलेतोयेउससेज़रूरकहदेना
वोइसबरसभीआयातोमरहीजाऊँगी
यक़ींहैरबपे'सबीला'वोमेरीसुनलेगा
मैंहोकेबा-वज़ूहाथोंकोजबउठाऊँगी
  - Sabeela Inam Siddiqui
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy