ujaala kar ke zulmat men ghira hooñ | उजाला कर के ज़ुल्मत में घिरा हूँ

  - Saba Akbarabadi
उजालाकरकेज़ुल्मतमेंघिराहूँ
चराग़-ए-रहगुज़रथाबुझगयाहूँ
तिरीतस्वीरकैसेबनसकेगी
हरइकसादावरक़कोदेखताहूँ
मुझेतूफ़ानसेशिकवानहींहै
हलाक-ए-बे-रुख़ी-ए-नाख़ुदाहूँ
तिरेतीरोंकाअंदाज़ाकरूँँगा
अभीतोज़ख़्मदिलकेगुनगारहाहूँ
तुम्हेंसूरजनज़रआएँगेअपने
मैंआईनाहूँऔरटूटाहुआहूँ
सबाआहिस्ताआहिस्ताउड़ूँगा
मैंदस्त-ए-नाज़कारंग-ए-हिनाहूँ
  - Saba Akbarabadi
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