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Saarthi Baidyanath
suno ik mulk ne roti ka atom bam banaakar
suno ik mulk ne roti ka atom bam banaakar | सुनो इक मुल्क ने रोटी का एटम बम बनाकर
- Saarthi Baidyanath
सुनो
इक
मुल्क
ने
रोटी
का
एटम
बम
बनाकर
उसी
से
भूखे
लोगों
की
हिफ़ाज़त
कर
रहा
है
- Saarthi Baidyanath
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पहली
ग़लती
पर
मत
छोड़ो
मुझको
तुम
पहली
रोटी
गोल
नहीं
बनती
जानाँ
Tanoj Dadhich
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सुनहरी
लड़कियों
इनको
मिलो
मिलो
न
मिलो
ग़रीब
होते
हैं
बस
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Abbas Tabish
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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भूख
है
तो
सब्र
कर,
रोटी
नहीं
तो
क्या
हुआ
आजकल
दिल्ली
में
है
ज़ेर-ए-बहस
ये
मुद्दआ
Dushyant Kumar
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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बड़े
नादान
हो
तुम
भी
ज़रा
समझा
करो
बातें
गले
मिलकर
जो
रोती
है
बिछड़कर
कितना
रोएगी
Ankita Singh
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मिलना
हमारा
कम
हुआ
फिर
बात
कम
हुई
क़िस्तों
में
मुझ
ग़रीब
की
ख़ैरात
कम
हुई
Bhawana Srivastava
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कौन
हूँ
मैं
न
कोई
पूछ
रहा
हैरत
है
एक
ऐसा
भी
नगर
होगा
कहाँ
सोचा
था
Saarthi Baidyanath
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कितने
ही
अवतार
पयम्बर
आए
पर
धरती
का
दुख
जैसा
था
वैसा
ही
है
Saarthi Baidyanath
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अगर
तोड़ा
हो
मैंने
दिल
किसी
का
तो
मेरा
दिल
भी
या
रब
टूट
जाए
Saarthi Baidyanath
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इस
क़दर
है
दबाव
आँखों
में
जैसे
के
हो
चुनाव
आँखों
में
सबकी
आँखों
में
नूर
रब
का
है
मत
करो
भेद-भाव
आँखों
में
उफ़
ये
पाकीज़गी
भरी
आँखें
डाल
दूँ
क्या
पड़ाव
आँखों
में
सच
कहूँ
तो
तुम्हारी
आँखों
की
खल
रही
है
अभाव
आँखों
में
मन
से
मन
जब
तलक
नहीं
मिलता
दिखती
है
मनमुटाव
आँखों
में
और
क्या
चाहिए
तुझे
अय
दिल
हो
अगर
रख-रखाव
आँखों
में
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Saarthi Baidyanath
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किराये
का
लगाया
मज़हबी
बाज़ार
हमने
भी
खड़ी
कर
ली
दिलों
के
दरमियाँ
दीवार
हमने
भी
लगा
यूँँ
जब
शराफ़त
से
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
उठा
लीं
हाथ
में
बन्दूक
और
तलवार
हमने
भी
न
कोई
सिलसिला
निकला
हजारों
ख़त
लिखे
लेकिन
अभी
अफ़सोस
होता
है
लिखा
बेकार
हमने
भी
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Saarthi Baidyanath
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