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Saarthi Baidyanath
she’r nahin kah leta jab tak main koi
she’r nahin kah leta jab tak main koi | शे’र नहीं कह लेता जब तक मैं कोई
- Saarthi Baidyanath
शे’र
नहीं
कह
लेता
जब
तक
मैं
कोई
कोरे
काग़ज़
ताका-झांकी
करते
हैं
- Saarthi Baidyanath
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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बारूद
के
बदले
हाथों
में
आ
जाए
किताब
तो
अच्छा
हो
ऐ
काश
हमारी
आँखों
का
इक्कीसवाँ
ख़्वाब
तो
अच्छा
हो
Ghulam Mohammad Qasir
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इधर
जीवन
के
पन्ने
फट
रहे
हैं
उधर
पुस्तक
विमोचन
हो
रहा
है
Abhijeet Mishra
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बहाने
मिलने
के
शायद
न
रोज़
रोज़
मिलें
किताब
माँग
लिया
कर
कभी
कभी
उस
सेे
Maher painter 'Musavvir'
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चाय
की
प्याली
में
नीली
टेबलेट
घोली
सह
में
सह
में
हाथों
ने
इक
किताब
फिर
खोली
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Bashir Badr
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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दवाओं
की
रसीदें
देख
ली
थीं
किताबें
इसलिए
माँगी
नहीं
हैं
Tanoj Dadhich
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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कोरे
काग़ज़
पर
रो
रहे
हो
तुम
मैं
तो
समझा
पढ़े
लिखे
हो
तुम
क्या
कहा
मुझ
सेे
दूर
जाना
है
इसका
मतलब
है
जा
चुके
हो
तुम
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Zubair Ali Tabish
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बहुत
हसीन
है
दुनिया
बताई
जाती
है
ये
वैसी
है
नहीं
जैसी
दिखाई
जाती
है
Saarthi Baidyanath
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उम्र
भर
साथ
निभाने
की
क़सम
टूट
गई
ज़िन्दगी
साथ
बिताने
की
क़सम
टूट
गई
भूल
जाऊँगा
तुझे
वा'दा
किया
था
मैंने
क्या
करूँँ
तुझको
भुलाने
की
क़सम
टूट
गई
बोल
अब
तेरी
सुनूँ
दिल
की
सुनूँ
या
रब
की
ऐसे
में
सारे
ज़माने
की
क़सम
टूट
गई
सारथी
आ
ही
गया
फिर
से
तेरी
बातों
में
तेरी
बातों
में
न
आने
की
क़सम
टूट
गई
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Saarthi Baidyanath
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इक
ग़ज़ल
पढ़
लूँ
इजाज़त
दें
अगर
आप
देखिये
कब
से
निज़ामत
कर
रहा
हूँ
Saarthi Baidyanath
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है
कोई
और
जो
अंबर
में
है
साँवला
चाँद
मेरे
घर
में
है
ख़त
कबूतर
से
जो
भिजवाया
है
तब
से
ये
जान
कबूतर
में
है
जब
भी
मिलना
हो
पलट
देता
हूँ
हर
मुलाक़ात
कैलेंडर
में
है
साथ
मैं
दूँ
तो
भला
किसका
दूँ
हुस्न
और
इश्क़
बराबर
में
है
ग़म
नहीं
है
कि
मुयस्सर
है
ग़म
इक
ख़ज़ाना
तो
मुक़द्दर
में
है
तू
समय
है
न
तेरा
ओर
न
छोर
तू
सदी
में
है
तू
पल-भर
में
है
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Saarthi Baidyanath
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मौत
को
देखकर
लगा
कि
मैं
उसकी
ज़िंदादिली
पे
मर
जाऊँ
Saarthi Baidyanath
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