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Saarthi Baidyanath
naujawaani ki kenchuli apni
naujawaani ki kenchuli apni | नौजवानी की केंचुली अपनी
- Saarthi Baidyanath
नौजवानी
की
केंचुली
अपनी
मैंने
दफ़्तर
में
टांग
रक्खी
है
- Saarthi Baidyanath
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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मैंने
ख़्वाबों
में
भी
तेरे
जिस्म
की
ख़्वाहिश
न
रक्खी
गर
तुझे
यूँँ
प्यार
कोई
और
कर
पाए
तो
कहना
Harsh saxena
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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वर्षों
की
सब
याद
सजा
के
रक्खी
है
घर
में
बस
सामान
नहीं
है,
समझा
कर
Shivam Tiwari
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रखी
थी
ले
के
कॉपी
हम
ने
उसकी
ख़ुशी
से
झूम
उठा
बस्ता
हमारा
Ankit Maurya
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याद
तो
होंगी
वो
बातें
तुझे
अब
भी
लेकिन
शेल्फ़
में
रक्खी
हुई
बंद
किताबों
की
तरह
Parveen Shakir
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बना
रक्खी
हैं
दीवारों
पे
तस्वीरें
परिंदों
की
वगर्ना
हम
तो
अपने
घर
की
वीरानी
से
मर
जाएँ
Afzal Khan
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और
आसान
नहीं
हो
सकता
फ़रियादों
को
पूरा
करना
एक
ही
आस
लगा
रक्खी
है,
ख़ुदा
सभी
बन्दों
ने
तुझ
सेे
Siddharth Saaz
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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कहते
भी
हैं
कि
हम
सेे
मुहब्बत
नहीं
उन्हें
और
अब
तलक
रखी
है
निशानी
सँभाल
कर
Divy Kamaldhwaj
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दूर
जाते
ही
नज़र
आने
लगे
हो
तुम
मुझे
लग
रहा
है
पास
की
मेरी
नज़र
कमज़ोर
है
Saarthi Baidyanath
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हसीं
है
फूल
सी
नाज़ुक
कली
जैसी
मेरी
बेटी
दु'आओं
की
नदी
जैसी
जतन
से
प्यार
से
ऐ
बाग़बां
रखना
ख़ुदा
का
नूर
है
ये
है
परी
जैसी
बसा
लो
आँख
में
मोती
सरीखा
तुम
पलों
की
ज़िन्दगी
में
है
सदी
जैसी
चहक
उट्ठे
ये
मन-आंगन
परिंदे
सा
फ़ज़ा
में
गूंजती
है
बाँसुरी
जैसी
कभी
ग़म
का
बियाबां
हो
न
घबराना
ग़मों
के
दरमियां
ये
है
ख़ुशी
जैसी
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Saarthi Baidyanath
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दीद
का
लुत्फ़
हो
गया
हासिल
अब
नज़र
कर्ज़दार
है
तो
है
Saarthi Baidyanath
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मेरे
सवाल
का
उल्टा
जवाब
देते
हो
तेरे
सवाल
का
सीधा
जवाब
कैसे
दूँ
Saarthi Baidyanath
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झूठे
नक़ली
मुद्दों
पर
आ
मिट्टी
डालें
घर-घर
में
आज
आग
लगी
है
पानी
डालें
Saarthi Baidyanath
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