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Saarthi Baidyanath
jhoothe naqli muddon par aa miTTi daalen
jhoothe naqli muddon par aa miTTi daalen | झूठे नक़ली मुद्दों पर आ मिट्टी डालें
- Saarthi Baidyanath
झूठे
नक़ली
मुद्दों
पर
आ
मिट्टी
डालें
घर-घर
में
आज
आग
लगी
है
पानी
डालें
- Saarthi Baidyanath
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क्या
बोला
मुझे
ख़ुद
को
तुम्हारा
नहीं
कहना
ये
बात
कभी
मुझ
सेे
दुबारा
नहीं
कहना
ये
हुक़्म
भी
उस
जान
से
प्यारे
ने
दिया
है
कुछ
भी
हो
मुझे
जान
से
प्यारा
नहीं
कहना
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Ali Zaryoun
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ख़बर
मिली
है
स्टेशन
पर
तुम
भी
आने
वाली
हो
रेल
को
पीछे
छोड़
दीया
है
साँसों
की
रफ़्तारों
ने
Shadab Javed
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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दुनिया
के
भरम
को
कुछ
यूँँ
तोड़
दिया
मैंने
इस
बार
नसीबों
का
रुख़
मोड़
दिया
मैंने
Harsh saxena
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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तुमको
हिचकी
लेने
से
भी
दिक़्क़त
थी
मैंने
तुमको
याद
ही
करना
छोड़
दिया
Mehshar Afridi
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हम
हसीनों
के
पास
बैठे
थे
दोस्त
सारे
उदास
बैठे
थे
Saarthi Baidyanath
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अलग
सब
सेे
तबीअत
है
करें
क्या
मुझे
बुत
से
मोहब्बत
है
करें
क्या
दु'आ
में
मौत
मेरी
मांगते
हैं
सितमगर
की
शरारत
है
करें
क्या
बदन
संदल
निग़ाहें
शबनमी
हैं
क़सम
से
वो
क़यामत
है
करें
क्या
मैं
आदत
शा'इरी
की
छोड़
देता
मगर
दिल
की
ज़रूरत
है
करें
क्या
कोई
भी
डुगडुगी
सुनकर
न
आया
मदारी
को
शिकायत
है
करें
क्या
सनम
ने
रख
लिया
है
मुझको
दिल
में
न
मरने
की
इजाज़त
है
करें
क्या
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Saarthi Baidyanath
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बात
कुछ
भी
नहीं
गुलों
में
है
लुत्फ़
जो
है
वो
ख़ुश्बुओं
में
है
तुम
रिहाई
का
इंतिज़ार
करो
सुख
अभी
दुख
के
चंगुलों
में
है
फिर
गुलाबी
है
आसमाँ
का
मिज़ाज
रंग
उल्फ़त
का
बारिशों
में
है
मैं
तो
मंज़िल
पे
आ
गया
लेकिन
चाप
क़दमों
की
रास्तों
में
है
तुझ
सेे
मैं
दिल
की
एक
बात
कहूँ
तू
मेरे
ख़ास
दोस्तों
में
है
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Saarthi Baidyanath
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कोई
जाकर
बताए
बुत-शिकन
को
कि
बुत
के
ज़र्रे
ज़र्रे
में
ख़ुदा
है
Saarthi Baidyanath
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कौन
हूँ
मैं
न
कोई
पूछ
रहा
हैरत
है
एक
ऐसा
भी
नगर
होगा
कहाँ
सोचा
था
Saarthi Baidyanath
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