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Saarthi Baidyanath
main jitne aainon ko jaanta hooñ
main jitne aainon ko jaanta hooñ | मैं जितने आइनों को जानता हूँ
- Saarthi Baidyanath
मैं
जितने
आइनों
को
जानता
हूँ
सभी
पर
धूल
की
परतें
जमी
हैं
- Saarthi Baidyanath
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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कमरे
में
फैलता
रहा
सिगरेट
का
धुआँ
मैं
बंद
खिड़कियों
की
तरफ़
देखता
रहा
Kafeel Aazar Amrohvi
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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न
हारा
है
इश्क़
और
न
दुनिया
थकी
है
दिया
जल
रहा
है
हवा
चल
रही
है
Khumar Barabankvi
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चराग़ों
को
उछाला
जा
रहा
है
हवा
पर
रौब
डाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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धुआँ
जो
कुछ
घरों
से
उठ
रहा
है
न
पूरे
शहर
पर
छाए
तो
कहना
Javed Akhtar
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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है
कोई
और
जो
अंबर
में
है
साँवला
चाँद
मेरे
घर
में
है
ख़त
कबूतर
से
जो
भिजवाया
है
तब
से
ये
जान
कबूतर
में
है
जब
भी
मिलना
हो
पलट
देता
हूँ
हर
मुलाक़ात
कैलेंडर
में
है
साथ
मैं
दूँ
तो
भला
किसका
दूँ
हुस्न
और
इश्क़
बराबर
में
है
ग़म
नहीं
है
कि
मुयस्सर
है
ग़म
इक
ख़ज़ाना
तो
मुक़द्दर
में
है
तू
समय
है
न
तेरा
ओर
न
छोर
तू
सदी
में
है
तू
पल-भर
में
है
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Saarthi Baidyanath
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ग़ज़ल,
राहें
न
देखे,
अब
यहीं
से
लौट
जाना
है
ख़बर
दे
दो,
ख़बर
वालों,
दुबारा
मैं
न
आऊँगा
Saarthi Baidyanath
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वादियों
में
प्यार
के
मौसम
न
होते
कौन
करता
शा'इरी
गर
हम
न
होते
Saarthi Baidyanath
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चाँद
से
कल
मेरी
सगाई
है
रक़्म-ए-मेहर
ज़मीं
दिया
जाए
Saarthi Baidyanath
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गली
से
उसके
जब
गुजरूँ
शरारत
आ
ही
जाती
है
वही
सिहरन
वही
तड़पन
हरारत
आ
ही
जाती
है
Saarthi Baidyanath
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