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Saarthi Baidyanath
ik dooje ke aañsu ponch nahin sakte
ik dooje ke aañsu ponch nahin sakte | इक दूजे के आँसू पोंछ नहीं सकते
- Saarthi Baidyanath
इक
दूजे
के
आँसू
पोंछ
नहीं
सकते
मजबूरी
आख़िर
मजबूरी
होती
है
- Saarthi Baidyanath
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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मेरे
आँसू
नहीं
थम
रहे
कि
वो
मुझ
सेे
जुदा
हो
गया
और
तुम
कह
रहे
हो
कि
छोड़ो
अब
ऐसा
भी
क्या
हो
गया
मय-कदों
में
मेरी
लाइनें
पढ़ते
फिरते
हैं
लोग
मैंने
जो
कुछ
भी
पी
कर
कहा
फ़लसफ़ा
हो
गया
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Tehzeeb Hafi
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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अश्कों
को
आरज़ू-ए-रिहाई
है
रोइए
आँखों
की
अब
इसी
में
भलाई
है
रोइए
Abbas Qamar
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जहाँ
में
शोर
इतना
है
कहीं
भी
देखिए
आप
ख़मोशी
बेचने
की
भी
दुकानें
खुल
गई
हैं
Saarthi Baidyanath
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कोई
बच्चा
पहाड़ा
रट
रहा
है
अँधेरा
धीरे-
धीरे
छँट
रहा
है
Saarthi Baidyanath
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उसका
आँचल
ज़रा
सरक
सा
गया
दिल
तो
दिल
है
सो
दिल
बहक
सा
गया
यूँँ
समझ
लो
कि
आस-पास
हूँ
मैं
दिल
किसी
का
अगर
धड़क
सा
गया
रोते-रोते
मुझे
हुआ
महसूस
कोई
आँसू
कहीं
अटक
सा
गया
रूह
के
जिस्म
से
निकलते
ही
जिस्म
का
आइना
चटक
सा
गया
अब
तो
हिम्मत
जवाब
देने
लगी
क्या
कहूँ
'सारथी'
भी
थक
सा
गया
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Saarthi Baidyanath
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बात
कुछ
भी
नहीं
गुलों
में
है
लुत्फ़
जो
है
वो
ख़ुश्बुओं
में
है
तुम
रिहाई
का
इंतिज़ार
करो
सुख
अभी
दुख
के
चंगुलों
में
है
फिर
गुलाबी
है
आसमाँ
का
मिज़ाज
रंग
उल्फ़त
का
बारिशों
में
है
मैं
तो
मंज़िल
पे
आ
गया
लेकिन
चाप
क़दमों
की
रास्तों
में
है
तुझ
सेे
मैं
दिल
की
एक
बात
कहूँ
तू
मेरे
ख़ास
दोस्तों
में
है
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Saarthi Baidyanath
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मैं
एक
पुल
हूँ
मुझे
दीन-धर्म
क्या
मालूम
मेरा
तो
काम
है
लोगों
को
जोड़
कर
रखना
Saarthi Baidyanath
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