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Saarthi Baidyanath
hui ghazalon ki chori to laga yuñ
hui ghazalon ki chori to laga yuñ | हुई ग़ज़लों की चोरी तो लगा यूँँ
- Saarthi Baidyanath
हुई
ग़ज़लों
की
चोरी
तो
लगा
यूँँ
कोई
ज़ेवर
चुराकर
ले
गया
है
- Saarthi Baidyanath
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मैं
हो
गया
हूँ
क़ैद
हज़ारों
रिवाज़
में
मुझको
मेरी
ही
ज़ात
ने
फलने
नहीं
दिया
shaan manral
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हम
एक
रात
हुए
थे
क़रीब
और
क़रीब
फिर
उसके
बाद
का
क़िस्सा
गुनाह
जैसा
है
Aks samastipuri
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या
तो
जो
ना-फ़हम
हैं
वो
बोलते
हैं
इन
दिनों
या
जिन्हें
ख़ामोश
रहने
की
सज़ा
मालूम
है
Shuja Khawar
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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दिल
में
किसी
के
राह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
कितना
हसीं
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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एक
मुद्दत
से
परिंदे
की
तरह
ये
क़ैद
है
रूह
मेरे
जिस्म
से
'क़ासिद'
रिहा
होती
नहीं
Gurbir Chhaebrra
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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कल
कल
बहती
भारत
की
सब
नदियाँ
याद
करेंगी
ओ
जन
जन
के
नायक
तुझको
सदियाँ
याद
करेंगी
Saarthi Baidyanath
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चाँद
है
रात
है
न
ईदी
है
सिर्फ़
इस
दिल
में
नाउमीदी
है
Saarthi Baidyanath
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ये
माना
आप
से
बेहतर
नहीं
हूँ
मगर
मैं
खेल
से
बाहर
नहीं
हूँ
Saarthi Baidyanath
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बंदा-परवर
नज़र
नहीं
आता
कोई
रहबर
नज़र
नहीं
आता
जिस
बशर
की
तलाश
है
मुझको
वो
कहीं
पर
नज़र
नहीं
आता
आसमाँ
से
ज़मीन
दिखती
है
पर
मेरा
घर
नज़र
नहीं
आता
जो
हवा
का
ग़ुरूर
तोड़
सके
ऐसा
पत्थर
नज़र
नहीं
आता
चाँदनी
रात
है
मगर
फिर
भी
चाँद
छत
पर
नज़र
नहीं
आता
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Saarthi Baidyanath
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ज़िन्दगी
तुझ
सेे
शिकायत
क्या
करूँँ
मुस्कुराने
की
है
आदत
क्या
करूँँ
चाँद
सा
महबूब
मेरे
पास
है
मैं
सितारों
से
मोहब्बत
क्या
करूँँ
आख़िरी
अंजाम
सबको
है
पता
रौशनी
तेरी
हिफ़ाज़त
क्या
करूँँ
जाएगी
अब
इस
ज़ईफ़ी
में
कहाँ
शा'इरी
की
ये
बुरी
लत
क्या
करूँँ
दफ़्न
कर
दूँ
या
जला
दूँ
बोलिए
'सारथी'
का
आख़िरी
ख़त
क्या
करूँँ
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Saarthi Baidyanath
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