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Saarthi Baidyanath
hamaare naam ke aañsu tumhaari aankhoñ men
hamaare naam ke aañsu tumhaari aankhoñ men | हमारे नाम के आँसू तुम्हारी आँखों में
- Saarthi Baidyanath
हमारे
नाम
के
आँसू
तुम्हारी
आँखों
में
ये
कैसे
हो
गया
जादू
तुम्हारी
आँखों
में
- Saarthi Baidyanath
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अश्कों
को
आरज़ू-ए-रिहाई
है
रोइए
आँखों
की
अब
इसी
में
भलाई
है
रोइए
Abbas Qamar
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आँसू
हो
तेरे
पास
तो
तू
भी
ख़रीद
ला
ग़म
की
दुकाँ
में
बिकती
है
ख़ुशियाँ
बड़ी
बड़ी
SHIV SAFAR
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इस
बार
अश्क
कर
चुके
क़ीमत
अदायगी
इस
बार
तेरा
जाना
भी
ज़ाया'
नहीं
लगा
Aqib khan
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जिस
तरह
हँस
रहा
हूँ
मैं
पी
पी
के
गर्म
अश्क
यूँँ
दूसरा
हँसे
तो
कलेजा
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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और
कुछ
तोहफ़ा
न
था
जो
लाते
हम
तेरे
नियाज़
एक
दो
आँसू
थे
आँखों
में
सो
भर
लाएँ
हैं
हम
Meer Hasan
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मैं
तो
उस
वक़्त
से
डरता
हूँ
कि
वो
पूछ
न
ले
ये
अगर
ज़ब्त
का
आँसू
है
तो
टपका
कैसे
Ahmad Nadeem Qasmi
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जो
टूटे
और
बिखरे
वो
है
दुनिया
जो
बिखरे
और
टूटे
मैं
वही
हूँ
Saarthi Baidyanath
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आशिक़ों
की
आँख
का
मोती
ग़ज़ल
देखिए
हँसती,
कभी
रोती
ग़ज़ल
है
नफ़ासत
और
मोहब्बत
से
पली
तर्बियत
के
बीज
भी
बोती
ग़ज़ल
इन
लतीफ़ों-आफ़रीं
के
दरमियान
आलमी
मेयार
को
खोती
ग़ज़ल
मुफ़्लिसी
ये
भूख
और
तश्नालबी
देख
ये
मंज़र
कहाँ
सोती
ग़ज़ल
‘सारथी’
नींदें
न
ज़ाया'
कीजिए
रतजगा
करके
कहाँ
होती
ग़ज़ल
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Saarthi Baidyanath
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कई
मर्ज़
जो
कभी
लाइलाज
लगते
थे
सही
वक़्त
है
उनका
इलाज
करने
का
Saarthi Baidyanath
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हमारे
गाँव
की
गलियाँ
कभी
सूनी
नहीं
रहतीं
तुम्हारे
शहर
की
सड़कें
भले
सुनसान
हो
जाएँ
Saarthi Baidyanath
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अपने
दिल
की
हालत
ज़ाहिर
होने
दूँ
लेकिन
ऐसा
क्यूँँ
मैं
आख़िर
होने
दूँ
Saarthi Baidyanath
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