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Saarthi Baidyanath
dukh bacche ke jaisa zid
dukh bacche ke jaisa zid | दुख बच्चे के जैसा ज़िद्दी होता है
- Saarthi Baidyanath
दुख
बच्चे
के
जैसा
ज़िद्दी
होता
है
फ़रमाइश
पूरी
होने
तक
रोता
है
- Saarthi Baidyanath
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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सारथी
नींदें
न
ज़ाया'
कीजिए
रतजगा
करके
कहाँ
होती
ग़ज़ल
Saarthi Baidyanath
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अगर
लकड़ी
में
ही
दीमक
लगी
हो
बड़ा
तरखान
भी
क्या
कर
सकेगा
Saarthi Baidyanath
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मैं
हूँ
पूजा-घर
का
दीपक
बुझ
रहा
हूँ
जल
रहा
हूँ
Saarthi Baidyanath
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शोख़
नज़रों
के
इशारे
हो
गए
ख़ुशनुमा
सारे
नज़ारे
हो
गए
बादलों
की
क़ैद
में
है
आसमाँ
आज
हम
फिर
बे-सहारे
हो
गए
इश्क़
हम
पर
इस
क़दर
तारी
हुआ
हम
समुंदर
हम
कगारे
हो
गए
देखकर
हर
सिम्त
फैली
तीरगी
इंक़लाबी
चाँद-तारे
हो
गए
शा'इरी
सबकी
दुलारी
क्या
हुई
‘सारथी’
सबके
दुलारे
हो
गए
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Saarthi Baidyanath
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इश्क़
के
इतने
कारना
में
हैं
इसके
ममनून
हर
ज़माने
हैं
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Saarthi Baidyanath
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