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Saarthi Baidyanath
dost koi na mehraban koi
dost koi na mehraban koi | दोस्त कोई न मेह्रबाँ कोई
- Saarthi Baidyanath
दोस्त
कोई
न
मेह्रबाँ
कोई
काश
मिल
जाए
राज़दाँ
कोई
दिल
की
हालत
कुछ
आज
ऐसी
है
जैसे
लुट
जाए
कारवाँ
कोई
एक
ही
बार
इश्क़
होता
है
रोज़
होता
नहीं
जवाँ
कोई
तुम
को
वो
सल्तनत
मुबारक
हो
जिसकी
धरती
न
आसमाँ
कोई
सारथी
कह
सके
जिसे
अपना
'सारथी'
के
सिवा
कहाँ
कोई
- Saarthi Baidyanath
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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तुम
ने
स्वेटर
बुना
था
मिरे
नाम
का
मैं
भी
लाया
था
कुछ
सर्दियाँ
जंगली
Shakeel Azmi
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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कल
रात
बहुत
ग़ौर
किया
है
सो
हम
उसकी
तय
करके
उठे
हैं
कि
तमन्ना
ना
करेंगे
इस
बार
वो
तल्ख़ी
है
की
रूठे
भी
नहीं
हम
अबके
वो
लड़ाई
है
के
झगड़ा
ना
करेंगे
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Jaun Elia
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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इसी
ख़्वाब
में
ज़ाया'
किया
'ईद
को
हर
दम
कभी
बोले
वो
सीने
से
लगकर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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सीने
लगाऊँ
ग़ैर
को
तो
पूछता
है
दिल
किसकी
जगह
थी
और
ये
सीने
पे
कौन
है
Ankit Maurya
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हुस्न
चाहे
किसी
ज़बान
का
हो
इश्क़
उर्दू
ज़बान
वाला
है
Saarthi Baidyanath
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दिल
की
धरती
बंजर
है
जाने
कब
से
जाने
क्यूँँ
बरसात
अधूरी
होती
है
Saarthi Baidyanath
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अँधेरे
को
अँधेरा
बोलना
आता
नहीं
तुमको
तो
फिर
ऐ
दोस्त
उजाले
को
उजाला
कैसे
बोलोगे
Saarthi Baidyanath
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बंदा-परवर
नज़र
नहीं
आता
कोई
रहबर
नज़र
नहीं
आता
जिस
बशर
की
तलाश
है
मुझको
वो
कहीं
पर
नज़र
नहीं
आता
आसमाँ
से
ज़मीन
दिखती
है
पर
मेरा
घर
नज़र
नहीं
आता
जो
हवा
का
ग़ुरूर
तोड़
सके
ऐसा
पत्थर
नज़र
नहीं
आता
चाँदनी
रात
है
मगर
फिर
भी
चाँद
छत
पर
नज़र
नहीं
आता
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Saarthi Baidyanath
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हमारी
ज़िंदगी
आसान
हो
जाए
अगर
तू
रात
भर
मेहमान
हो
जाए
Saarthi Baidyanath
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